भूमिहीनों को करना होगा घर के लिए इंतजार
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
सरकारी पट्टे की भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना में बजट पाकर अपना आशियाना बनाकर चैन की बांसुरी बजाने का भूमिहीनों का सपना इस वित्तीय वर्ष में तो पूरा नहीं हो पाएगा। योजना में ग्रामीण इलाकों में वित्तीय वर्ष 2016-17 का लक्ष्य लगभग पूर्ण हो गया है। जबकि वित्तीय वर्ष 2017-18 में मात्र 28 लाभार्थियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है। भूमिहीनों को योजना के दायरे में लाने के लिए वीडीओ स्तर पर सर्वे चल रहा है। इसके बाद बनी सूची का सत्यापन कराकर फाइनल सूची तैयार होगी। इसे शासन को भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया में चार-पांच माह का समय लगना लाजमी है। ऐसे में भूमिहीनों को पट्टा आवंटन के बाद इस साल की पात्रता सूची में स्थान बनाना नामुमकिन ही लगता है।
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प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण योजना व उसकी स्थिति
-वर्ष 2016-18-कुल 984 आवास, 922 लाभार्थियों के खातों में प्रथम किस्त
-वर्ष 2017-18-कुल लक्ष्य 28 आवास, लाभार्थियों का चयन होना है
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योजना की पात्रता
-वर्ष 2011 के आर्थिक सर्वे में नाम
-पांच एकड़ से कम सिंचित भूमि
-बैंक में 50 हजार से ज्यादा क्रेडिट लिमिट न हो
-आयकर दाता न हो
-आवास बनाने के लिए भूमि हो
-वर्तमान आवास कच्चा हो
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लाभार्थी को मिलने वाली सुविधाएं
- आवास निर्माण को 1.20 लाख रुपये, शौचालय निर्माण को 12 हजार तथा मनरेगा योजना में 90 दिन का काम।
वित्तीय वर्ष 2016-17 में प्रधानमंत्री आवास योजना में कुल 984 में से 922 लाभार्थियों के खाते में पहली किस्त का पैसा डाल दिया गया है। वर्ष 2017-18 का 28 आवास निर्माण का लक्ष्य अभी आया है। भूमिहीनों को पट्टे पर सरकारी भूमि दिलाकर योजना के दायरे में लाने के लिए वीडीओ स्तर से सर्वे कराया जा रहा है।
गोरखनाथ भट्ट, परियोजना निदेशक डीआरडीए