हाथरस जिले के फुलरई मुगलगढ़ी गांव में सत्संग के आयोजन के लिए पिछले एक महीने से चंदा हो रहा था। तीस से ज्यादा लोगों की टीम गांव-गांव जाकर अपने समाज के लोगों से पैसा इकट्ठा कर रही थी। आयोजन के लिए ही 70 लाख से ज्यादा का चंदा तो हाथरस क्षेत्र के लोगों से ही हो चुका था। जबकि एक बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है, जो आनलाइन पैसा भेज रहे थे। चंदे के लिए जिसकी जो आस्था हो वह दे सकता था। सौ रुपये देने वाले भी थे और 20 हजार देने वाले भी। समिति से जुड़े लोग जब चंदा इकट्ठा कर लेते थे तो मधुकर को सौंप देते थे। बाद में इस पैसे को ट्रस्ट में जमा कर दिया जाता था। बताया तो यहां तक जाता है कि चंदे की 30 फीसदी रकम इकट्ठा करने वाले रख लेते हैं, जबकि 70 फीसदी पैसा ट्रस्ट में जमा कर दिया जाता है। इसकी कोई रसीद नहीं दी जाती बल्कि डायरी में लिख लिया जाता है।
कई विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी जुड़े हैं समिति से
हाथरस हादसे के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी से भोले बाबा की सत्संग समिति से जुड़े कई राज सामने आए हैं। वेदप्रकाश मधुकर खुद एटा जिले में मनरेगा में तकनीकी सहायक के रूप में तैनात है। वह भोले बाबा समिति का मुख्य सेवादार भी है। जहां भी बड़े सत्संग होते हैं उनका आयोजन करना और फंड इकट्ठा करना उसकी ही जिम्मेदारी है। पुलिस को पूछताछ के दौरान जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक कई सरकारी विभागों में उसने सत्संग समिति के सदस्य बना रखे हैं। अधिकारियों तक को जोड़ रखा है। पुलिस की जांच कमेटी ने अब इस दिशा में भी काम शुरू कर दिया है। पुलिस को जानकारी मिली है कि एक विभाग में तो बाकायदा बाबा का फोटो लगा हुआ था। जब हाथरस हादसा हुआ तो तस्वीर हटा दी गई है। वहीं कुछ सेवानिवृत अधिकारी भी फुले बाबा से जुड़े हैं और वह भी जगह जगह सत्संग के आयोजन कराते हैं। ऐसे कुछ सेवानिवृत अधिकारियों के बारे में पुलिस को जानकारी मिल गई है। यह भी संभव है कि उनके पूछताछ की जाए।
हाथरस एसपी ने कहा
हाथरस एसपी निपुण अग्रवाल का कहना है कि मधुकर से पूछताछ में पता चला है कि कई राजनीतिक पार्टियां उसके संपर्क में थीं। फंड इकट्ठा करने के संबंध में गहराई से जांच की जा रही है। पूछताछ में ऐसा भी प्रतीत हुआ है कि राजनीतिक दल अपने राजनीतिक और निजी स्वार्थ के लिए इनसे जुड़े हैं। देवप्रकाश मधुकर के सभी बैंक खाते और संपत्ति की जांच की जा रही है। इसके लिए संबंधित एजेंसियों का भी सहयोग लिया जाएगा।