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आखिर प्रशासन को आई ट्रांसपोर्ट नगर की सुध

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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व्यवसाय की दृष्टि से समृद्ध अलीगढ़ जिले में निरंतर पनपते व्यवसाय के चलते ट्रांसपोर्टेशन की आवश्यकता पहले की तुलना में अत्यधिक बढ़ गई है। लेकिन एक सवाल अभी भी वही है कि आखिर महानगर में ट्रांसपोर्ट नगर कब बनेगा। समय समय पर इस इस प्रश्न को जन प्रतिनिधियों और जिले के आला अफसरों के सामने उठाते उठाते कई युवा ट्रांसपोर्टर अब प्रौढ़ावस्था में पहुंच चुके हैं तो कई वृद्घावस्था में, लेकिन यक्ष प्रश्न बनी यह समस्या अब भी ज्यूं की त्यूं बरकरार है।

हालांकि एडीए ने एक बार फिर खैर रोड पर गांव ल्हौसरा के पास और जीटी रोड पर पचपेड़ा के पास जमीन का सर्वे शुरू कर दिया है। दोनों जगह जमीन भी पसंद आ रही है और किसानों से जमीन अधिग्रहण पर राय-शुमारी ली जा रही है। वहीं अगले 15 दिन में किसी एक जमीन पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
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22 वर्षों से चली आ रही है डिमांड
जिले में ट्रांसपोर्ट नगर की मांग 22 वर्ष पुरानी है। द अलीगढ़ गुड्स एंड ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन इस मुद्दे पर तभी से लगातार संघर्ष कर रही है। वर्ष 2008 में अलीगढ़ जिले में कमिश्नरी की स्थापना हुई तो यह मांग जोर पकड़ गई। सभी को उम्मींद थी कि अब उनका अलग ट्रांसपोर्ट नगर का सपना पूरा हो सकेगा। लेकिन शासन प्रशासन की बेरुखी के चलते यह मांग अब भी अनुत्तरित है।

दो विभागों के बीच फुटबाल बना हुआ था मुद्दा
हालांकि ट्रांसपोर्ट नगर बनाने के मुद्दे पर ट्रांसपोर्टरों को संतुष्ट करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तमाम घोषणाएं पूर्व में भी हो चुकी हैं। लेकिन पिछले करीब डेढ़ साल से इस मुद्दे पर कुछ सक्रियता अवश्य दिखाई दी। पिछले साल तो ट्रांसपोर्ट नगर का मुद्दा दो विभागों अलीगढ़ विकास प्राधिकरण एवं यूपीएसआईडीसी के बीच इस मुद्दे को लेकर फुटबाल का मैच सरीखा ड्रामा हुआ। पिछली एडीए उपाध्यक्ष एवं यूपीएसआईडीसी की आरएम के मध्य बाकायदा वाक युद्ध तक छिड़ा था। जहां एक ओर एडीए वीसी तालानगरी और उसके बाद छेरत के पास की यूपीएसआईडीसी का सर्वे कराकर जबरन जमीन लेने पर तुली थी तो यूपीएसआईडीसी की आरएम नियमों का हवाला देकर किसी भी सूरत में जमीन देने को तैयार नहीं थी।

हाल ही में बंधी है उम्मीद
लगातार उठ रही इस डिमांड और प्रशासन के बड़े वाहनों के महानगर में अंदर न घुसने देने के संकल्प के साथ कमिश्नर के कड़े निर्देशों के बाद अलीगढ़ विकास प्राधिकरण ने हाल ही में खैर रोड स्थित गांव ल्होसरा एवं गभाना के तरफ हाइवे पर गांव पचपेड़ा के पास की जमीनों का सर्वे किया है। उच्चाधिकारियों की माने तो आगामी 15 दिनों में इनमें से एक जमीन फाइनल होने के आसार हैं।

गभाना के पास की जमीन से ट्रांसपोर्टर भी सहमत
सूत्रों की मानें तो गभाना के पास गांव पचपेड़ा के पास चिन्हित की गई जमीन से ट्रांसपोर्टर भी सहमत है। इससे पूर्व रामघाट रोड पर जमीन देने के प्रशासन के प्रस्ताव को ट्रांसपोर्टरों ने यह कहकर नकार दिया था कि उनका ज्यादातर माल दिल्ली की ओर से आता है। रामघाट रोड पर ट्रांसपोर्ट नगर बनने से उनके ट्रकों को महानगर के अंदर होकर आना पड़ेगा। इसमें ट्रैफिक नियम आड़े आएंगे। गांव पचखेड़ा की जमीन ट्रांसपोर्ट की दृष्टि से सुगम है।
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ट्रांसपोर्ट नगर के लिए विकास प्राधिकरण ने खैर रोड स्थित गांव ल्होसरा एवं गभाना की ओर गांव पचखेड़ा के पास जमीन देखी है। दोनों ही निजी भूमियां हैं। सर्वे अभी चल रहा है। 15 दिन में इस मामले में तस्वीर साफ होने के आसार हैं।
- डीएस भदौरिया, सचिव अलीगढ़ विकास प्राधिकरण
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