क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
हरदुआगंज मुठभेड़ में मारे गए नौशाद-मुस्तकीम का परिवार अलीगढ़ आने से पहले मुजफ्फरनगर और उससे पहले हरिद्वार में हिंदू नामों से भी रहा है। इस बात के साक्ष्य इनके पते के सत्यापन में जुटी पुलिस टीमों को मिल रहे हैं। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि यह लोग नाम बदलकर और धर्म बदलकर क्यों रहते आए हैं। हालांकि अभी अधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की जा रही। मगर कहा जा रहा है कि एक-दो दिन में इस बात का खुलासा साक्ष्यों के साथ पुलिस स्तर से किया जा सकता है।
पुलिस की तीन टीमें इन परिवारों के नाम व पतों के सत्यापन में जुटी हैं। जिन जिन जिलों में यह लोग रहे हैं, वहां इनके आपराधिक रिकार्ड, नाम पते और उनके वहां रहने की वजह, वहां के साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार इसी दौरान पता चला है कि हरिद्वार में मुस्तकीम की मां शबाना उर्फ रानी सोमवती के नाम से और एक फूफा राम सिंह के नाम से रहा है। इसके साक्ष्य पुलिस टीम को मिल गए हैं। इसके बाद पुलिस टीमें यह जानने में जुटी हैं कि आखिर ऐसा क्यों।
इसे लेकर एसएसपी अजय कुमार साहनी इतना ही बताते हैं कि हर ठिकाना बदलने पर यह लोग अपना नाम बदलते आए हैं। ताकि पिछले अपराध या पिछले ठिकाने का कोई साक्ष्य पुलिस को न मिल सके। इन साक्ष्यों को संकलित किया जा रहा है। जल्द ही तस्वीर साफ की जाएगी।
हरदुआगंज मुठभेड़ में विपक्षी कर रहे
सुप्रीम कोर्ट का वकील दिलाने की पैरवी
हरदुआगंज मुठभेड़ में मारे गए मुस्तकीम और नौशाद के परिजनों को इंसाफ दिलाने के लिए विपक्षी राजनीतिक दल अब हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सशक्त पैरवी करने के मूड में आ गए हैं ताकि चुनाव से पहले इस मुद्दे को गरमाया जा सके। इस संबंध में विपक्षी राजनीतिक दल अंदरखाने एकजुट होकर मदद कराने में जुट गए हैं। जिससे पीड़ित परिवारों को एक बेहतर और वरिष्ठ अधिवक्ता मिल सके जो उनकी पैरवी कर सके। इसमें सपा, बसपा और कांग्रेस एकजुट हो रहे हैं।