क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलीगढ़-आगरा रीजन की रोडवेज बसों में फर्जी टिकट से रोडवेज को सालाना करोड़ों का चूना लगाने वाले माफिया गिरोह पर कार्रवाई के बाद अब विभागीय गाज गिरना शुरू हो गया है। सबसे पहले माफिया गिरोह के सरगना और बाबू को निलंबित किया गया है। वहीं अब मिलीभगत में शामिल वर्तमान व पूर्व में तैनात रहे अफसरों पर भी कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं। उम्मीद है कि यह कार्रवाई देर रात तक या एक-दो दिन में संभव होगी।
इधर, एसटीएफ की टीम अब इस मामले में अफसरों की भूमिका की जांच में जुट गई है। इसके चलते अधिकारी अपनी जान बचाने में सक्रिय हो गए हैं। इस घटनाक्रम में वह लोग परेशान हैं जो किसी न किसी तरह से माफिया के संपर्क में थे। आगरा-अलीगढ़ परिक्षेत्र के परिवहन निगम के अधिकारी भी अपने दामन में लगने वाले दाग के बचाव में जुटे हैं।
मंगलवार को एसटीएफ की टीम में इगलास में फर्जी टिकट बनाकर परिवहन निगम को प्रतिमाह करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले रैकेट को मुख्य सरगना समेत गिरफ्तार किया था। इस मामले में माफिया देवेंद्र पहलवान और उसके साथियों ने पुलिस पर हमला भी किया था।
एसटीएफ के इस खुलासे के बाद रोडवेज कर्मचारियों अधिकारियों में अफरा-तफरी मची हुई है । एसटीएफ टीम जैसे जैसे मामले की पड़ताल कर रही है, नए खुलासे होते जा रहे हैं।
इधर, एसटीएफ सूत्रों का कहना है परिवहन निगम में चल रहे इस रैकेट में रोडवेज के वर्तमान ही नहीं पुराने अधिकारी भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। ईद की छुट्टी के बाद गुरुवार को जब क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय खुला तो प्रत्येक कर्मचारी की जुबां पर खुलासे की यह चर्चा थी।
साथ ही इस रैकेट में चलने वाली बुद्ध विहार डिपो की बसें भी वर्कशॉप में खड़ी रहीं। कार्रवाई के क्रम में जेल भेजे गए हाथरस डिपो में तैनात बाबू मेघ सिंह व हाथरस में ही तैनात सरगना परिचालक देवेंद्र को निलंबित कर दिया है। एआरएम हाथरस जीएस शर्मा ने इस निलंबन की पुष्टि की है।
उन्होंने बताया कि अप्रैल माह में देवेंद्र खुर्जा से ट्रांसफर होकर हाथरस आया था। वहीं मेघ सिंह को उन्होंने अपने पूर्व कार्यकाल में 2011-12 में ड्यूटी पर मौजूद न मिलने के चलते सस्पेंड किया था।
30 से 25 हजार महीने पर बिके थे अधिकारी
रोडवेज की बसों में फर्जी टिकट का रैकेट चलाने वाले माफिया परिवहन निगम के अधिकारियों को उनकी सीट के हिसाब से महीनादारी देता था। जांच में जुटी एसटीएफ टीम के सूत्रों का कहना है कि 20 से 25 हजार रुपये प्रतिमाह डिपो स्तर पर दिए जाते थे। इसके अलावा दी जाने वाली रकम अधिकारी और उसके अधिकारों हिसाब से तय की जाती थी।
9000 प्रतिमाह देता था बाउंसरों को
रैकेट की प्रमुख कड़ी बाउंसरों को माफिया प्रतिमाह 9000 रुपया देता था। मथुरा अलीगढ़ मार्ग पर लगभग आधा दर्जन चेक पोस्ट बनाए गए थे, यहां पर इन बाउंसरों की ड्यूटी लगाई जाती थी। इस मामले में इगलास थाने की पुलिस की भूमिका भी काफी संदिग्ध है। एसटीएफ टीम के मुताबिक जब बाउंसर टीम के साथ हाथापाई कर रहे थे, उस समय इलाका पुलिस खड़ी तमाशा देख रही थी।
मोबाइल रिकॉर्डिंग से खुलेगा अधिकारियों का राज
एसटीएफ टीम अब मुख्य सरगना देवेंद्र और मेघ सिंह समय अन्य आरोपियों के मोबाइल रिकॉर्डिंग खंगालने में जुट गई है। एसटीएफ के इस कदम ने रोडवेज अधिकारियों की बेचैनी और बढ़ा दी है। इन रिकॉर्डिंग के आधार पर जांच टीम आगे बढ़ेगी। इधर, बुधवार की शाम एसटीएफ के जवानों ने गांधी पार्क बस अड्डे पर कुछ परिचालकों से पूछताछ भी की। एसटीएफ टीम के कुछ लोग अपने नंबर परिचालकों को देकर गए हैं।
अपने गांव के युवाओं को दिलाई नौकरी
टीम ने हाल ही में हुई संविदा भर्ती पर भी जांच भी शुरू कर दी है। अभी हाल ही में निगम में संविदा पर परिचालकों की भर्ती हुई थी। इस भर्ती में मुख्य सरगना मेघ सिंह व देवेंद्र ने अपने गांव के युवाओं को बड़ी संख्या में भर्ती कराया है। यही कारण है कि सरगना इतने बड़े स्तर पर रैकेट को संचालित कर रहा था।
कीमती मकान हाल ही में दिया पत्नी को गिफ्ट में
रोडवेज में फर्जी टिकट रैकेट संचालित करने वाला मुख्य आरोपी देवेंद्र ने अभी लाखों रुपए कीमत का नया मकान अपनी पत्नी को गिफ्ट में दिया है। इस बात का खुलासा उसने स्वयं एसटीएफ टीम की पूछताछ में किया है। एसटीएफ सूत्रों का कहना है कि सरगना देवेंद्र व मेघ सिंह समेत अन्य काफी महंगे शौक रखते थे। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि देवेंद्र और उसका भाई कुछ ही महीनों में अपनी कार बदल देते थे। अभी हाल में उसने एक नई गाड़ी भी खरीदी है।
सत्ताधारी पार्टी के नेताओं को बुलाता था दंगल में
फर्जी टिकट रैकेट का मास्टर माइंड देवेंद्र पहलवान पूर्व में ब्रज केसरी रह चुका है। वह राया थाना क्षेत्र के गांव सिहोरा में हर साल बड़ा दंगल कराता है। अभी कुछ माह पहले ही उसने दंगल कराया था। इस दंगल में वह सत्ताधारी पार्टी के नेताओं को बुलाकर अधिकारियों पर अपना रुआब जमाता था। प्रदेश में सरकार किसी भी पार्टी की हो वह उस पार्टी में शामिल हो जाता और अपने गोरखधंधों को अंजाम देता था। हाल ही में उसने सिहोरा गांव में दंगल कराया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को बुलाया। वे उस के कार्यक्रम में शामिल होने को मथुरा पहुंच भी गए, लेकिन इससे पहले ही सोशल मीडिया पर पर किसी व्यक्ति ने उसका पूर्व में सत्ता में रही बसपा व सपा सरकार नेताओं के साथ लगाए गए होर्डिंग की पोस्ट डाल दी। यह पोस्ट इतनी तेजी से वायरल हुई के उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने इस कार्यक्रम में जाने से मना कर दिया।
आरएम ने मोबाइल किया बंद, लखनऊ में तलब होने की चर्चा
रोडवेज में फर्जी टिकट रैकेट का खुलासा होने के बाद अधिकारियों में अफरा-तफरी मची हुई है। अधिकारी किस कदर दहशत में हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि क्षेत्रीय प्रबंधक ने अपना मोबाइल भी बंद कर रखा है। इसके अलावा सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक वित्त यूपी सिंह भी फोन रिसीव नहीं कर रहे हैं। गुरुवार को क्षेत्रीय प्रबंधक अतुल त्रिपाठी को लखनऊ स्थित मुख्यालय में अधिकारियों द्वारा तलब करने की चर्चा भी जोरों पर थी, हालांकि कुछ अधिकारियों का यह भी कहना था कि क्षेत्रीय प्रबंधक लखनऊ में मीटिंग के लिए गए हुए हैं।