हदीस से ही समझ सकते हैं कुरान का सही मतलब : प्रो. शहाब
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
कुरान को समझने के लिए पैगंबर-ए-इस्लाम के संदेश (हदीस) से और निजी जीवन में भी उनकी सीरत से शिक्षा लेना बहुत जरूरी है, क्योंकि पैगंबर मुहम्मद मुस्तफा (सअ) के संदेश (हदीस) ही हमें कुरान का सही अर्थ समझा सकते हैं। यह बात अलबरकात पब्लिक स्कूल की ओर से आयोजित 10वें सीरत-उन-नबी मुकाबला के पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि प्रो. वाइस चांसलर एएमयू प्रोफेसर तबस्सुम शहाब ने कहीं।
अलबरकात एजूकेशनल सोसाइटी के अध्यक्ष प्रोफेसर सैयद मुहम्मद अमीन ने कहा कि पैगंबर साहब ने बताया कि अल्लाह पर ईमान केवल एक दार्शनिक सिद्धांत नहीं, बल्कि यही वह बीज है, जो इंसान के मन की जमीन में जब बोया जाता है तो इससे पूरी जिंदगी में ईमान की बहार आ जाती है। सोसाइटी के संयुक्त सचिव डॉ. अहमद मुज्तबा सिद्दीकी ने कहा कि रसूल अल्लाह ने निर्देश दिया कि जो व्यक्ति दीन (धर्म) का जितना भी ज्ञान प्राप्त करे, उसे दूसरों तक पहुंचाए। छात्र मुहम्मद राफेअ हसन ने नात पढ़ी।
इससे पहले सीरत उन नबी पर मुकाबले आयोजित किए गए। इसमें 37 स्कूलों व मदरसों के प्रतियोगियों ने हिस्सा लिया। सोसाइटी के समन्वयक डॉ. एफयू सिद्दीकी ने अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। आयोजन में अलबरकात सीरत समिति के संयोजक मौलाना मुहम्मद आमिर खान, मौलाना नोमान अजहरी, मौलाना अलाउद्दीन, फरहाना, बाजगा नूरैन, मुहम्मद नासिर हुसैन, अनीस मुज्तबा व अब्दुल हकीम आदि का सराहनीय योगदान रहा। संचालन छात्र मजहर सुबहानी ने किया।
इस मौके पर सोसाइटी के सदस्य व अलबरकात इस्लामिक स्टडीज के निदेशक सैयद मुहम्मद अमान, डॉ. एमआई खान, प्रोफेसर सगीर अफराहीम बेग, अलबरकात एजूकेशनल संस्थान के लेखाधिकारी मुहम्मद अकबर कादरी, अलबरकात पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या सबीहा खान, उप प्रधानाचार्या ताहिरा हुसैन, प्रधानाध्यापिका तबस्सुम सकलैन आदि मौजूद रहे।