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ओडीएफ: नौ दिन चले अढ़ाई कोस

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ओडीएफ: नौ दिन चले अढ़ाई कोस
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।

सरकारी मशीनरी की कछुआ चाल किसी से छिपी नहीं है। केंद्र एवं राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक खुले में शौच मुक्ति अभियान मामले में तो कमोबेश यही स्थिति नजर आती है।

इस मामले में पूरे प्रदेश में अधिकांश जनपदों की स्थिति ठीक नहीं है। अलीगढ़ में भी ये अभियान अपने लक्ष्य से काफी पीछे चल रहा है। प्रशासन की सुस्त रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दो सालों में प्रशासन कुल 1181 राजस्व गांवों को ओडीएफ के लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 14 गांवों को ओडीएफ का दर्जा दिला सका है।
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वह भी इस योजना के क्रियान्वयन एवं प्रचार-प्रसार पर लाखों रुपया बर्बाद करने के बाद। समय सीमा खत्म होने में अभी 12 महीनों का समय शेष है। ऐसे में यदि यही रफ्तार रही तो शेष बचे 1167 गांवों को ओडीएफ करना असंभव ही होगा।
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ओडीएफ की स्थिति वर्षवार
-वर्ष 2016-17-दस गांव
-वर्ष 2017-18-चार गांव
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अभियान की सफलता के लिए किए गए प्रयास
-गांवों में ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए जागरूकता अभियान
-दस दिन तक निकाला गया स्वच्छता रथ, गांव-गांव जाकर प्रचार
-वाल पेंटिंग, स्लोगन राइटिंग, स्वच्छता गृही टीमों का भ्रमण कार्यक्रम
-हर ग्राम पंचायत अधिकारी की पंचायत वार जिम्मेदारियां तय की
-हर गांव में ज्यादा से ज्यादा गरीब व्यक्तियों के शौचालयों का निर्माण
-हाल ही में ओडीएफ गांवों को छोड़कर शेष में 25-25 शौचालय निर्माण

ओडीएफ मामले में शासनादेश
-गंगा किनारे वाले जनपदों में 31 दिसंबर 2017 तक ओडीएफ
-शेष जनपदों में दो अक्तूबर 2018 तक ओडीएफ

ओडीएफ के चयन की प्रक्रिया
ओडीएफ में ग्राम पंचायत के चयन के लिए सर्वप्रथम पंचायत राज विभाग की टीमें गांव के परिवारों का सर्वे कर यह सुनिश्चित करती हैं कि कितने परिवारों के घर में पहले से शौचालय हैं और कितनों के घर नहीं।

उदाहरण के तौर पर एक गांव में 100 परिवार हैं और 60 के घर में पहले से शौचालय हैं। शेष 40 परिवारों को जागरूक व प्रेरित कर और गरीबी की रेखा से नीचे होने पर पंचायत राज विभाग की ओर से शौचालय बनवाए जाते हैं।

शत प्रतिशत शौचालय निर्माण के बाद इसे जनपद स्तरीय प्रक्रिया के तहत आनलाइन पोर्टल पर डाला जाता है। इसके बाद प्रस्ताव मंडल स्तर पर भेजा जाता है। मंडल स्तर पर डीडी पंचायत की अध्यक्षता वाली टीम तय बिंदुओं पर सर्वे के उपरांत प्रमाणपत्र देती है। इसके बाद किसी गांव अथवा ग्राम पंचायत को ओडीएफ घोषित किया जाता है।
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अब तक 21 गांव ओडीएफ की श्रेणी में आ चुके हैं। इनमें से चार को मंडल स्तर पर ओडीएफ प्रमाणपत्र मिल चुका है। इस तरह दो वित्तीय वर्षों में जिले में 14 गांव ओडीएफ की श्रेणी में आ गए हैं। शेष 17 गांवों को भी जल्द प्रमाणपत्र मिलने के आसार हैं।
-जिया अहमद, जिला कोआर्डिनेटर ओडीएफ अभियान
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