कोविड महामारी का असर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर साफ दिखाई दे रहा है। गंभीर बीमारियों के इलाज में दिक्कत आ रही है और गंभीर बीमारियों में ऑपरेशन नहीं हो पा रहे। इमरजेंसी या ट्रॉमा केस को छोड़ दें तो सरकारी व निजी क्षेत्र में, हर स्तर पर ऑपरेशन टाले जा रहे हैं। अपने शहर में सरकारी व निजी क्षेत्र के डॉक्टरों के स्तर से आर्थोपैडिक, जनरल और प्रसव ऑपरेशन संख्या का औसत 200 करीब प्रतिदिन थी, जिसमें सिर्फ प्रसव ऑपरेशन व एक्सीडेंट ऑपरेशन ही हो रहे हैं। जिनका आंकड़ा 50 ऑपरेशन हर रोज है। बाकी को जो जरूरी नहीं है, उन्हें संक्रमण से बचाव के चलते टाला जा रहा है। मरीजों को दवाओं के सहारे चलाया जा रहा है। इस तरह अपने जिले में एक अप्रैल से 15 मई तक 6000 ऑपरेशन टलने का आंकड़ा है।
35 लाख की आबादी वाले जिले के जिला मुख्यालय पर स्वास्थ्य सेवाओं की कमी नहीं है। अपने जिले के साथ-साथ यहां आसपास के हाथरस, एटा व कासगंज तक के मरीज सरकारी व निजी क्षेत्र के डॉक्टरों से लाभान्वित होते हैं। कई प्रमुख विषय विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास तो दूरदराज से लोग इलाज के लिए आते हैं। मगर कोविड के दौर में डॉक्टरों ने मरीजों को बुलाने के बजाय टेलीफोन पर इलाज देने की प्रक्रिया पर जोर दे रखा है। गंभीर या इमरजेंसी मरीजों को ही बुलाकर इलाज देने या जरूरत पर ऑपरेशन करने का काम किया जा रहा है। अन्यथा की स्थिति में प्रयास किया जा रहा है कि अगर दवाओं से फिलहाल ऑपरेशन टल जाए तो ज्यादा बेहतर है। इसके पीछे की मूल वजह गंभीर मरीज को संक्रमण से बचाना भी है। इसके अलावा ज्यादातर निजी क्षेत्र के बड़े नर्सिंग होम कोविड का इलाज कर रहे हैं। इसलिए भी वे अन्य स्वास्थ्य सेवाएं देने से बच रहे हैं। हां, अधिकांश फिजिशियन जरूर अन्य बीमारियों के मरीजों को देख रहे हैं। सीएमएस जिला अस्पताल डॉ.रामकिशन स्वीकारते हैं कि हमारे यहां ऑपरेशन पूरी तरह बंद हैं।
टेलीमेडिसिन से पोर्ट ब्लेयर तक हो रहा इलाज
आईएमए सचिव डॉ. भरत वार्ष्णेय बताते हैं उनके दो दर्जन डॉक्टरों की टीम टेलीमेडिसिन सेवा में लगी है। इनमें दो डॉक्टर मयंक व सुबेक के पास तो दिन भर में 20-20 कॉल आ रही हैं। ऑनलाइन उनकी टीम के नंबर प्रसारित होने के कारण पोर्ट ब्लेयर तक से कॉल आई हैं। इसके अलावा पुणे, मुंबई तक की कॉल आई हैं। किसी के परिचित यहां बीमार हैं तो उनके लिए, किसी ने वहां बैठकर अपने लिए इलाज लिया है। ज्यादातर कोविड से जुड़े मरीज ही कॉल कर रहे हैं।
मेडिकल में भी 3000 ओपीडी की बंद, टाले जा रहे सामान्य ऑपरेशन
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज में सामान्य दिनों में ओपीडी में मेडिसिन विभाग में ही 600 मरीज तक आते हैं। इसके अलावा जनरल सर्जरी विभाग में 400 मरीज प्रतिदिन तक देखे जाते हैं। ऑर्थोपेडिक की ओपीडी में 600 मरीज तक प्रतिदिन सामान्य दिनों में आते हैं । इसके अलावा त्वचा रोग, स्त्री रोग, बाल रोग, नाक कान और गला आदि विभागों में भी प्रतिदिन 500 मरीज तक ओपीडी में देखे जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक सामान्य दिनों में तीन हजार मरीज प्रतिदिन ओपीडी में देखे जाते हैं। मेडिकल कॉलेज मैं प्रतिदिन 50 के आसपास प्रसव होते हैं। इस समय प्रसव के लिए अलग ऑपरेशन थिएटर बनाया गया है। जिससे कि अगर कोविड से संक्रमित महिला का प्रसव होना हो तो उसका अलग प्रसव किया जा सके। सामान्य महिलाओं के लिए अलग प्रसव कक्ष है। इस समय हृदय रोग, दुर्घटना, स्त्री रोग के अगर ऑपरेशन के मामले हैं तो वह जारी हैं। जिन ऑपरेशन को टाला जा सकता है वह ऑपरेशन अभी नहीं की जा रहे हैं।
-इन दिनों कुछ डॉक्टरों ने जरूर अपनी ओपीडी बंद कर रखी हैं, जबकि काफी संख्या में सुबह की ओपीडी चला रहे हैं। मरीजों को देख रहे हैं। रहा सवाल ऑपरेशन का तो इमरजेंसी-ट्रामा केस के ऑपरेशन ही किए जा रहे हैं। बाकी जो गैर जरूरी हैं, उन्हें जानबूझकर नहीं, बल्कि सक्रमण से बचाने के लिए टाला जा रहा है। हमारे दो दर्जन डॉक्टरों की टीम टेलीमेडिसिन के जरिये निशुल्क ओपीडी सेवाएं दे रही है। गायनी केस हो रहे हैं, हां, उनमें गिरावट जरूर है।
-डॉ.भरत वार्ष्णेय, सचिव आईएमए
संयुक्त आंकड़े एक नजर में
-9000 की ओपीडी का औसत शहर में था।
-200 करीब ऑपरेशन का औसत था रोजाना।
-850 करीब प्रसव का भी औसत था रोजाना।
-50 करीब प्रसव-इमरजेंसी ऑपरेशन जारी।
-6000 करीब ऑपरेशन अब तक टले होंगे।
सरकारी अस्पतालों के आंकड़े
- जिला अस्पताल--2500 की ओपीडी थी हर दिन की, 10 ऑपरेशन का था औसत, अब सिर्फ कुत्ता काटे के इंजेक्शन व बच्चों की ओपीडी जारी।
-महिला अस्पताल--500 की ओपीडी थी हर दिन की, 50 होती थे प्रसव, अब 100 इमरजेंसी केस देखे जा रहे हैं, 10 प्रसव का है हर दिन औसत।
-दीनदयाल अस्पताल--1000 की ओपीडी थी हर दिन की, पूर्णत: बंद।
निजी अस्पतालों के आंकड़े
- 5000 की ओपीडी का फिजिशियन और महिला चिकित्सकों का औसत था। अब यह ओपीडी 500 के आसपास सीमित है।
-150 आर्थोपैडिक व जनरल ऑपरेशन का था प्रतिदिन यह औसत, अब सिर्फ इमरजेंसी तक ही सीमित है।
-350 प्रसव सामान्य व ऑपरेशन से प्रतिदिन का है औसत, जिनमें 50 करीब ऑपरेशन होंगे। ग्रामीण क्षेत्र से प्रसूताओं के आने में गिरावट।
यह भी जानें-
-150 हॉस्पिटल व नर्सिंग होम निजी क्षेत्र के सक्रिय
-50 प्रमुख फिजिशियन व विषय विशेषज्ञ हैं सक्रिय
-30 प्रमुख आर्थोपैडिक व जनरल सर्जन हैं सक्रिय
-65 प्रमुख महिला चिकित्सक भी शहर में हैं सक्रिय