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जिले की 10 फीसदी आबादी में बसे हैं 60 फीसदी अपराधी

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वैसे तो अपराधियों के खिलाफ समय-समय पर तरह-तरह के ऑपरेशन व अभियान छेड़े जाते रहे हैं। मगर जिले में पहली बार एक नए तरह का सर्वे एसएसपी कलानिधि नैथानी ने कराया है। इस सर्वे पर गौर करें तो 35 लाख की आबादी वाले जिले का मात्र 10 फीसदी आबादी क्षेत्र ऐसा है, जिसमें 60 फीसदी अपराधी बसे हैं।
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एसएसपी ने यह डाटा पिछले 10 साल के सक्रिय अपराधियों के रिहायशी एरिया वार तैयार कराया है। 15 कैटेगिरी में पिछले 10 साल में कुल 20 हजार 297 अपराधी चिह्नित किए गए हैं। जिनके खिलाफ बुधवार से भौतिक सत्यापन का काम शुरू कराया जाएगा और उनकी गतिविधियों के अनुसार हिस्ट्रीशीट खोलने व गैंगेस्टर की कार्रवाई करने का काम होगा।
एसएसपी के निर्देशन पर थाना वार एक सर्वे कराया गया। जिसमें देखा गया कि बीते दस साल में 15 कैटेगिरी में किन-किन अपराधियों के खिलाफ क्या-क्या और कितने-कितने मुकदमे दर्ज किए गए। मुकदमों की विवेचना के अनुसार इन अपराधियों का कार्य क्षेत्र भी देखा गया। इस अनुसार यह तय पाया गया कि जिले के 10 फीसदी आबादी सर्वाधिक अपराधियों से भरी पड़ी है।
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जिनमें शहरी क्षेत्र में सिविल लाइंस, देहली गेट, बन्नादेवी व गांधीपार्क और देहात क्षेत्र में अतरौली, टप्पल, इगलास व खैर ऐसे क्षेत्र हैं, जहां एक एक हजार से ऊपर अपराधी हैं। आज से इन सभी का बीट वार भौतिक सत्यापन किया जाएगा और इनकी गतिविधियां, सक्रियता, सामाजिक सक्रियता आदि देखी जाएगी। इसके बाद इन पर कार्रवाई तय होगी।
जिले के 30 फीसदी गांवों में एक भी अपराधी नहीं
इस सर्वे के अनुसार जिले के 30 फीसदी गांव ऐसे हैं, जहां पिछले 10 साल में पुलिस की संगीन अपराध की 15 कैटेगिरी में न तो कोई अपराध दर्ज हुआ और न इन गांवों में 10 साल में कोई अपराधी बसा हुआ पाया गया है। इसे लेकर पुलिस स्तर से इन गांवों को मॉडल के रूप में अन्य गांवों में पेश किया जाएगा। भौतिक सत्यापन के दौरान बताया जाएगा कि किस तरह वे गांव अपराध और अपराधी विहीन हैं।
100 हिस्ट्रीशीट खुलीं-अब और खुलेंगी
पुलिस ने सर्वे के दौरान अब तक सौ अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोली हैं, जबकि बुधवार से शुरू होकर पूरे जून माह तक चलने वाले अभियान में और हिस्ट्रीशीट खोली जाएंगी। इसके लिए अभी से कम से कम हस्ट्रीशीट खोलने का लक्ष्य रखा गया है।
इस तरह बसे हैं 20 हजार 297 अपराधी
-1490 सिविल लाइंस में (शहर क्षेत्र में सर्वाधिक), 1419 अतरौली में (देहात क्षेत्र में सर्वाधिक), 1327 देहली गेट में, 1287 बन्नादेवी में, 1282 टप्पल में, 1048 गांधीपार्क में, 1291 इगलास में, 1357 खैर में,654 कोतवाली में, 828 क्वार्सी में, 857 अकराबाद में, 690 हरदुआगंज में, 482 बरला में, 677 दादों में, 437 सासनी गेट में, 519 लोधा में, 465 पिसावा में, 542 गोंडा में, 422 गभाना में, 408 जवां में, 464 छर्रा में, 349 पाली में, 437 चंडौस में, 304 गोधा में, 325 गंगीरी में, 485 मडराक में, 229 महुआ खेड़ा में, 231 विजयगढ़ में बसे हैं।
ये अपराध की 15 कैटेगिरी
-हत्या, हमला, डकैती, लूट, नकबजनी, वसूली, फिरौती को अपहरण, पॉक्सो, अवैध शराब, शस्त्र व्यापार, खनन, वस्तु एक्ट, देह व्यापार, चोरी, गोवध, नशा तस्कर
- हमने जिले के एरिया वार दस साल के अपराधियों की सूची तैयार की है। जिसमें 30 फीसदी गांव ऐसे हैं जहां कोई अपराधी नहीं है, जबकि जिले की 10 फीसदी आबादी में 60 फीसदी अपराधी बसे हैं। इनका बुधवार से सत्यापन शुरू होगा। वैसे तो हमने पिछले माह नई 283 बीट बनाई हैं। फिर भी जहां ज्यादा अपराधी हैं, वहां बीट सिपाही के साथ सहयोगी बीट सिपाही लगाया जाएगा। उसे सबबीट का नाम दिया जाएगा। उन अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोलने व गैंगेस्टर लगाने की कार्रवाई होगी। - कलानिधि नैथानी, एसएसपी
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