न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरीडोर कार्यक्रम में महानगर के पुराने औद्योगिक संगठनों को किनारे किये जाने से उद्यमियों में अंदर ही अंदर आक्रोश है। कुछ तो यह भी कहते सुने गए कि ऐसा हुआ तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डिफेंस कॉरीडोर का सपना चकनाचूर हो जाएगा।
डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरीडोर की कमान नवगठित फेडरेशन ऑफ इनोवेटिव मैनुफ्रैक्चर्स (एफआईएम) के हाथ में थी। प्रतिभागियों के चयन से लेकर अन्य महत्वपूर्ण फैसलों में इसी संगठन के जुड़े लोगों की चली। रॉयल रेजीडेंसी के अलीगढ़ के स्टॉल पर भी एफआईएम के बैनर लगे थे। वहां रखे प्रोडक्ट भी पूरे अलीगढ़ का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे थे।
दबी जुबान लोग यह भी कह रहे है कि महानगर के पुराने एवं हैसियत वाले औद्योगिक संगठनों को किनारा कर दिया गया। लघु उद्योग भारती यहां 18 वर्ष से कार्य कर रही है। इसी तरह तालानगरी, औद्योगिक आस्थान एवं सासनीगेट आदि क्षेत्रों में औद्योगिक क्षेत्र में कई संगठन एवं व्यापारिक संगठन कार्य कर रहे हैं। लघु उद्योग भारती के एक सदस्य ने तो यहां तक कहा कि पूर्व में किसी सरकार ने ऐसा नहीं किया था। यहीं कारण रहा कि लघु उद्योग भारती के सदस्य बैच लगाकर आए थे ताकि उनकी पहचान अलग से हो सकें।
लघु उद्योग भारती भाजपा एवं आरएसएस की अनुषंगी इकाई है, इसलिए इसके नेता-कार्यकर्ता खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं। उन्हें भय सता रहा है कि कुछ भी बोलने पर कार्यवाही हो सकती है। नाराज एवं असंतुष्ट तो महानगर के अन्य कई संगठन के पदाधिकारी भी है लेकिन उचित मौके की ताक में है।
हमलोग कम्युनिकेटिंग एजेंसी है। चाहते है कि डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरीडोर का लाभ सबको मिले। उद्यमियों के पास संपर्क किया गया था। लघु उद्योग भारती आज भी हमारा नेतृत्व करती है। कार्यक्रम बहुत खूबसूरती से संपन्न हो गया। लखनऊ एवं आगरा में मौजूद अधिकारी अलीगढ़ के कार्यक्रम की जमकर तारीफ कर रहे थे। इसमें अलीगढ़ सांसद एवं प्रशासन का विशेष योगदान रहा। अब आगे की रणनीति तय करेंगे। सभी उद्यमी मिलजुल कर आगे बढ़ेंगे।
- धनजीत वाड्रा, अध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ इनोवेटिव मैनुफ्रैक्चर्स