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12 दिन से महिला थाने में ‘कैद’ किशोरी को भेजा जेल

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12 दिन से महिला थाने में ‘कैद’ किशोरी भेजी जेल
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।

12 दिन से महिला थाने में ‘कैद’ भाभी की दहेज हत्या के मुकदमे में नामजद किशोरी को रविवार को जेल भेज दिया गया। प्रकरण समाचार पत्रों की सुर्खियां बनने के बाद जब एसएसपी ने सख्ती दिखाई तो गंगीरी पुलिस और मुकदमा विवेचक ने आनन-फानन यह औपचारिकता पूरी की।

मगर पुलिस नामजद किशोरी को बालिग बता रही है और बालिग बताते हुए उसे जिला कारागार भेजा गया है। साथ ही तर्क दिया है कि अगर वह किशोरी है तो परिजन अदालत में साबित करेंगे। तभी उसे नाबालिग होने का लाभ मिल सकेगा।
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वाकये के अनुसार गंगीरी के गांव बढ़ारी बुजुर्ग निवासी उमेश की पत्नी रचना की 15 अगस्त को जलने से मौत हो गई थी। इसमें रचना के मायके वालों ने पति आदि ससुरालियों पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया, जिसमें रचना की नाबालिग ननद भी आरोपी है।

मुकदमे में पुलिस ने पति को पहले ही दिन जेल भेज दिया था और उसी समय कोचिंग से लौट रही उमेश की 15 वर्षीय बहन को हिरासत में लेकर महिला थाने भेज दिया था। वह उसी दिन से महिला थाने में थी।

चूंकि महिला थाने में किशोरी रो-रोकर दिन रात काट रही थी तो शनिवार शाम मीडियाकर्मियों की नजर उस पर पड़ी। जब मामले में सवाल जवाब शुरू हुए तो महिला थाने से लेकर गंगीरी पुलिस तक हरकत में आई और शनिवार देर रात ही उसे महिला थाने से हटाकर गंगीरी शिफ्ट कर दिया गया।

इधर, रविवार को खबर सामने आने पर एसएसपी राजेश पांडेय ने मुकदमे के विवेचक व गंगीरी पुलिस को इतने दिन तक नामजद को हिरासत में रखने पर जमकर लताड़ा। इसके बाद आनन-फानन रविवार को किशोरी को कोर्ट के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया गया। साथ ही उसे बालिग बताकर कोर्ट में पेश किया है। साथ ही दस्तावेजों में गिरफ्तारी रविवार को ही नामजद के घर से दिखाई है।

इंस्पेक्टर गंगीरी का तर्क है कि नामजद बालिग है, उसका मेडिकल कराया गया है। अगर परिवार या किशोरी नाबालिग बता रही है तो कोर्ट में उन्हें साक्ष्य पेश करने होंगे।

कल तक अंजान थे कोतवाल और सीओ
इस प्रकरण में कल तक मुकदमे के विवेचक सीओ बरला अनुज चौधरी व गंगीरी कोतवाल अंजान बने हुए थे। उनसे जब इस मामले में मीडिया ने बात की तो वह एक ही बात कहते रहे कि ऐसे किसी प्रकरण की उन्हें जानकारी नहीं है।
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12 दिन तक हिरासत में रखना आयोग तक पहुंचा
इस मामले में आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट प्रतीक चौधरी ने मानवाधिकार आयोग से शिकायत की है, जिसमें किसी भी नामजद को 12 दिन तक पुलिस हिरासत में रखने को कानून का मखौल करार दिया है। इस पर थाना पुलिस व विवेचक पर कार्रवाई की मांग की है। इसी तरह स्मार्ट विलेज फाउंडेशन के विपिन चौधरी ने अखबारों की खबर को ट्विटर पर डीजीपी यूपी, सीएम यूपी को टैग कर थाना पुलिस के कृत्य पर कार्रवाई का अनुरोध किया है।

-यह प्रकरण संज्ञान में आया तो इस मामले में सीओ से नाराजगी जताई। इस पर सीओ द्वारा नामजद को जेल भेजा गया है।
-राजेश पांडेय एसएसपी
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