ब्यूरो, अमर उजाला, हाथरस।
देश में सफाई को लेकर केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा कराए गए सर्वे में देश के सबसे गंदे शहरों में हाथरस का नाम भी शामिल होने के एक माह बाद भी शहर में सफाई को लेकर पालिका प्रशासन नहीं चेता है। स्थिति अभी भी जस की तस बनी हुई है।
केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के तहत डीएम अमित कुमार सिंह ने तीन एसडीएम को शहर के 27 वार्डों में प्रतिदिन निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। तीन दिन के निरीक्षण के बाद डीएम ने खुद शहर में भ्रमण कर सफाई व्यवस्था को देखा। यूं तो नगर पालिका प्रशासन हर माह सफाई व्यवस्था पर लाखों रुपये खर्च करती है, लेकिन शहर की सफाई फिर भी रामभरोसे चल रही है। चेयरमैन सफाई व्यवस्था को लेकर खुद गंभीर हैं। केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा द्वारा ही स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की गई है। हाथरस नगर पालिका की चेयरमैन भी भाजपा की ही हैं। पालिका के लापरवाह सफाई अधिकारियों को भी वह सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए निर्देशित नहीं कर पा रही हैं।
कूड़ा एकत्रित करने के उपकरण धूल फांक रहे
भारत सरकार का स्वच्छ भारत अभियान कैसे साकार हो। नगर पालिका में लाखों रुपये के सफाई उपकरण धूल फांक रहे हैं। अभी हाल ही में 50 रिक्शे मय डस्टबिन शहर की तंग गलियों से डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने खरीदे गए थे। टेंपो भी कूड़ा एकत्रित करने के लिए हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉली भी हैं। रिक्शे तो शहर में एक दिन ही चलकर रह गए। यह रिक्शे भी चेयरमैन ने जब उनकी शुरुआत की थी, उस दिन ही चले हैं। उसके बाद नगर पालिका मेें खड़े धूल फांक रहे हैं।
यहां नालों में भरी हैं सिल्ट
आगरा रोड, अलीगढ़ रोड, बीएच ऑयल मिल रोड, चामड़ गेट, सीयल, ऊंटगाड़ी मोहल्ला, नयाबांस रोड, मोहनगंज, चिंताहरण रोड, घास मंडी, बालापट्टी, भूरापीर, सादाबाद गेट, ढकपुरा रोड आदि क्षेत्रों के नाले-नालियां सिल्ट से अटे पड़े हैं।
शहर में सफाई व्यवस्था के लिए नगर पालिका को सख्त आदेश दिए गए हैं। मैं खुद इस पर निगरानी रख रहा हूं। इस काम में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
-अमित कुमार सिंह, डीएम हाथरस