पांच दिन तक एक ऐसी महिला जिला अस्पताल में लावारिश के रूप में जानी जाती रही, जिसका परिवार भरा पूरा है। घरवाले जहां उसे लापता होने पर तलाश रहे थे, वहीं महिला की कफन में लिपटी पड़ी लाश मोरचरी के अंदर शिनाख्त का इंतजार कर रही थी।
मामला कुछ यूं है कि 29 जनवरी को एक युवक जिला अस्पताल में इमरजेंसी में 35 वर्षीय महिला को भर्ती कराकर चला गया। उस वक्त उसने पर्चे में खुद को भाई बताया था, लेकिन जैसे ही महिला गंभीर बीमार अवस्था में अस्पताल में भर्ती हुई वह युवक गायब हो गया।
काफी देर तक जब वह अस्पताल नहीं पहुंचा तो कर्मचारियों व अन्य तीमारदारों ने उसकी देखरेख की। दो दिन बाद 31 जनवरी को हालत बिगड़ने पर महिला की अस्पताल में ही मौत हो गई। आनन-फानन उसे मोरचरी में शिनाख्त के लिए रखवा दिया था।
वहीं दूसरी ओर 72 घंटे बीत जाने पर महिला के शव को बुधवार को पुलिस के सुपुर्द करना था, इससे पहले ही खैर के गांव बरका निवासी कुछ लोग अस्तपाल पहुंचे और इमरजेंसी में महिला के बारे में जानकारी करने लगे। तभी मृत महिला का जिक्र हुआ।
जब उसका शव दिखाया गया तो फरीद मोहम्मद नाम के युवक ने उसकी शिनाख्त अपनी पत्नी निशा के रूप में की, जो ढाई माह पूर्व घर छोड़कर चली आई थी। उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं थी। जिसके चलते वह घर भी नहीं लौटी। वहीं दुपहर बाद परिजन उसके शव को अपने साथ ले गए।