थाना पुलिस के अनुसार किशोरी ने पूछताछ व अपने बयानों में स्वीकारा है कि वह घटना वाले दिन सुबह स्कूल गई थी। वहां से अपने दोस्तों संग घूमते हुए घर पहुंची। मगर घर पर ताला लगा मिला। फिर वापस घूमने निकल आई। तभी स्टेशन पहुंच गई। वहां अचानक से उसे मंजू नाम की महिला मिल गई। जहां उसने बातों में खुद को अनाथ बता दिया। बस मंजू उसे अपने साथ ले गई। बाद में उसको बेच दिया।
पहले भी इस धंधे में शामिल रहा यह गिरोह
पुलिस पूछताछ में मंजू ने स्वीकारा कि वह टीबी मरीज है। घटना वाले दिन इसी के उपचार के लिए अलीगढ़ आई थी। तभी स्टेशन पर उसकी किशोरी से मुलाकात हो गई। वह उसे अनाथ बताने पर अपने साथ ले गई। यहां से वह उसे सीधे प्रमोद के घर लेकर पहुंची। जहां एक माह पांच दिन तक उसके घर पर रखा। प्रमोद व अन्य आरोपियों की मदद से ही उसको बेचना तय किया गया। हालांकि पहले 85 हजार में बेचना तय हुआ। मगर पुनीत ने 65 हजार रुपये ही दिए। पकड़े गए आरोपियों से 12 हजार 600 रुपये बरामद किए गए। आरोपियों के विषय में उजागर हुआ है कि ये पहले भी इस तरह के धंधे में शामिल रहे हैं। पूर्व में इसी तरह एक बच्चे को आगरा में बेच चुके हैं। पुलिस उसके विषय में जानकारी जुटा रही है। मंजू, प्रमोद व बालकांत ने स्वीकारा है कि जिनके पास बच्चे नहीं होते या जिनकी शादियां नहीं होतीं, उनको इसी तरह से मानव तस्करी कर बच्चे व युवतियां लाकर बेचते हैं। मगर पहली बार पकड़े गए हैं।
स्टेशनों के सीसीटीवी ने खोला राज
पुलिस के अनुसार इस मामले में ईएमयू ट्रेन से किशोरी महिला मंजू संग बरहन तक गई। इसके बाद वहां से दूसरे वाहन में गई। उसी सीसीटीवी की मदद से पहले महिला की पहचान शुरू की गई। बाद में अन्य आरोपियों तक पहुंचा जा सका।