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चिल्लाते रह गए एक्सटर्नल, इंटरनल को मिल गया दाखिला

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की काउंसलिंग (फाइनल मोप अप राउंड) के दौरान बाहरी छात्र और उनके अभिभावक विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी एक न सुनी। 7 एक्सटर्नल व 2 दिव्यांग समेत सभी 10 सीटों पर इंटरनल (एएमयू) छात्रों को दाखिला दे दिया गया।

तमाम तरह के विरोध के बावजूद शुक्रवार को जेएन मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की काउंसलिंग हुई। एएमयू प्रशासन ने सिर्फ इंटरनल छात्रों को ही रिपोर्ट करने दिया। इससे इंटरनल छात्र एवं उनके अभिभावक गदगद थे, वहीं एक्सटर्नल छात्र एवं उनके अभिभावकों ने एएमयू के खिलाफ नारेबाजी की। डीन कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। बाहरी छात्रों के अभिभावकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पीएमओ, मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर, एमसीसी, राहुल गांधी, योगी आदित्यनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आदि को ट्वीट कर एएमयू प्रशासन की शिकायत की और न्याय दिलाने की गुहार लगाई।
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अभिभावकों ने आरोप लगाया कि कुछ युवक उन लोगों के बीच पहुंचे और नारेबाजी का विरोध किया। एएमयू से चले जाने के लिए धमकाया। 31 सितंबर को जेएन मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की काउंसलिंग (फाइनल मोप अप राउंड) निर्धारित था। कुल 10 सीट खाली थीं। एमसीसी ने 7 सीट एक्सटर्नल, 2 सीट दिव्यांग (एक्सटर्नल) एवं 1 सीट इंटरनल जारी की गई, लेकिन 30 सितंबर को एएमयू प्रशासन ने एक्सटर्नल सीटों पर इंटरनल को दाखिला देने से संबंधित नोटिस जारी कर दिया। एक्सटर्नल को अपात्र घोषित कर दिया गया। इससे विभिन्न प्रदेशों से आए छात्र एवं अभिभावक आक्रोशित रहे। कई छात्र रोते हुए अलीगढ़ से वापस लौटे।

नारेबाजी के दौरान कुछ युवक आए और नारेबाजी का विरोध करने लगे। उन्होंने एएमयू से चले जाने एवं कोर्ट में लड़ने की बात कही। उन्होंने धमकी भी दी। - मान प्रकाश सैनी, अभिभावक, राजस्थान।

जब एमसीसी एवं डीजीएस की लिस्ट यहां मान्य नहीं है तो उन्हें चाहिए कि एएमयू को लिस्ट से बाहर निकाल दें। यहां मनमानी चल रही है। कोई सुनने वाला नहीं। - अनुकृति यादव, आगरा, अभ्यर्थी।

एएमयू अलग रूल बनाकर चल रहा है। हम लोगों को रिपोर्ट तक नहीं करने दिया। एएमयू में एमसीसी की गाइड लाइन फॉलो नहीं की जा रही है। - डॉ. एसके झा, अभिभावक, दरभंगा, बिहार
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सभी 10 सीटों पर इंटरनल को दाखिला दिया गया है। एमसीसी ने अपनी पॉलिसी बनाकर सीटें भरने के लिए कहा था। दिव्यांग के लिए 2 रिक्त सीटों पर अभ्यर्थी नहीं पहुंचे तो उन्हें जनरल में बदलकर दो इंटरनल छात्रों को दाखिला दे दिया गया है। एडमिशन में एमसीसी गाइड लाइन का कहीं भी उल्लंघन नहीं किया गया है। - प्रो. एससी शर्मा, डीन, मेडिसन फैकल्टी, एएमयू।
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