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शब्द हैं सहमे, मौन हैं नगमे, छंद आज रोते हैं...

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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पद्मभूषण डॉ. गोपालदास नीरज की स्मृति में साहित्यिक संस्था शिखर की ओर से ‘सनाथ जन कल्याण समिति’ के बैनर तले आयकर भवन में संगोष्ठी, राष्ट्रीय एकता कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि अनिल भार्गव ने नीरज को गीताें का ऐसा बादशाह बताया, जिनके सामने कविता हाथ बांधे खड़ी रहती थी। आयकर आयुक्त (अपील) सुनील वाजपेयी ‘सरल’ ने शायर जमील अहमद सियानवी को ‘नीरज स्मृति सम्मान’ व शायर प्रीतम सिंह परवेज को ‘शिखरश्री सम्मान’ प्रदान किया।

सम्मेलन में शायर जीमल मजहर सियानवी ने यूं कहा कि ‘सारी दुनिया को छोड़कर ‘नीरज’, सो गए आग ओढ़कर ‘नीरज’। शायर प्रीतम सिंह परवेज ने सुनाया ‘जा चुके आप कहीं दूर दिशा में नीरज रोता फिरता है यहां आपका प्रीतम परवेज’। अशोक अंजुम ने अपने जज्बात यूं पेश किए ‘वफाएं लड़खड़ाती हैं भरोसा टूट जाता है, जरा सी ठेस से रिश्तों का धागा टूट जाता है’।
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शायर डॉ. मुजीब शहजर ने सुनाया ‘आला जिनकी शख्सियत आला है किरदार, सदियों में नीरज जैसे पैदा हाें फनकार’। युवा शायर नितिन नायाब ने पढ़ा ‘मैं सोचता हूं देखकर मैं अपनी बेटी की तरफ, वो कौन सा सवाब था जो मेरे घर में आ गया’। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. दौलतराम शर्मा ने सुनाया ‘युवाओं में अब हम जुनूं चाहते हैं, फना हो वतन पे वो खूं चाहते हैं’।
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आयकर आयुक्त सुनील वाजपेयी ‘सरल’ ने नीरज जी को यूं याद किया ‘शब्द हैं सहमे, मौन हैं नगमे, छंद आज रोते हैं तुमसा लिखने वाले जग में विरले ही होते हैं। इनके अलावा सुधांशु गोस्वामी ने रचना सुनाई। इस अवसर पर नरेंद्र शर्मा, श्रीओम वार्ष्णेय, श्यामसुंदर सिंह, पूनम शर्मा, हरीशंकर, चंद्ररतन अग्रवाल, भूपेंद्र शर्मा पतंजलि, देवेंद्र पाल सिंह, संजय, एससी अस्थाना आदि मौजूद रहे ।

बाद में अशोक अंजुम को सर्जना पुरस्कार मिलने पर उनका सम्मान किया गया। हरीश बेताब ने कहा कि सर्जना पुरस्कार मिलना अशोक अंजुम के बहुमुखी का सम्मान है।
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