सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन (सीबीएसई) 2021-22 के 12वीं की परीक्षा में 40 फीसदी विद्यार्थियों ने हिंदी से मुंह मोड़ लिया था। परीक्षा में 5504 में से 2214 विद्यार्थियों ने हिंदी से दूरी बनाई थी। परीक्षा में पंजीकृत 5504 में 5431 परीक्षार्थी हाजिर रहे, जबकि 73 गैरहाजिर रहे। 12वीं में हिंदी वैकल्पिक विषय है, जिसे 40.22 फीसदी विद्यार्थियों ने नहीं लिया।
हिंदी के अलावा शारीरिक शिक्षा भी वैकल्पिक विषय है, लेकिन हिंदी लेने के बजाय शारीरिक शिक्षा विद्यार्थियों की पहली पसंद रही। विद्यार्थियों ने कंप्यूटर साइंस, इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी को वैकल्पिक विषय के लिया था। हिंदी के साथ संस्कृत का हाल भी ठीक नहीं था। संस्कृत को एक भी छात्र ने वैकल्पिक विषय के रूप में नहीं चुना था। हालांकि, 142 छात्रों ने उर्दू विषय लिया था। इनमें 78 छात्र-छात्राएं अलबरकात पब्लिक स्कूल की थीं।
बड़ी बहन के रूप में जी रही है हिंदी : प्रेम कुमार
कहानीकार डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि हमारा देश बहु विविध भाषी है। यहां बहुत भाषाएं हैं, इनमें हिंदी को सबसे बड़ी के रूप में जीना चाहिए, जो जी रही है और हिंदी को सम्मान भी मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस के मायने इसलिए ज्यादा बढ़ जाते हैं कि उसे याद करें। हिंदी को प्रोत्साहित भी करें। हिंदी किसी शासन, सत्ता या और किसी आधार पर आगे नहीं बढ़ रही है, बल्कि स्वत: एक नदी की तरह प्रवाहित हो रही है। एक भाषा का गुण होता है।
मीडिया, पर्यटन, फिल्म, देश-विदेश में हिंदी की उपस्थिति है। उसने अपने अंदर तमाम भाषाओं के शब्द को समाहित किया है। हिंदी उन्नति पर है, इसकी चिंता करने की जरूरत नहीं है। भाषा अपने आप बढ़ती चली जाती है। अफसोस सिर्फ इतना है कि अंग्रेजी का हिंदी पर प्रभाव बढ़ता जा रहा है। हिंदी हिंग्लिश बन गया है। ग्रामीण हो या कस्बे में जो लोग अंग्रेजी और हिंदी को मिलाकर बोल रहे हैं। इससे हिंदी की विशुद्धता पर इस समय आंच है। मोबाइल और इंटरनेट ने हिंदी की वर्तनी और व्याकरण नष्ट करने में बड़ी भूमिका निभाई है। हिंदी की रक्षा करनी चाहिए। देश में सभी भाषाओं को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए। सबका इतिहास है। देश में बहुत भाषाएं हैं, इनमें हिंदी एक बड़ी बहन है।