आनंद एग्रोकेम गोपी लधुआ चीनी मिल को नीलाम करने, उसका खरीददार ढूंढने का मंडलायुक्त का आदेश कितना असरदार होगा..? यह 24 अप्रैल को सामने आ जाएगा। मिल की नीलामी की यही नई तारीख है।
ये बात और है कि गुजरे चार साल में इस मिल की नीलामी की 40 से ज्यादा तारीखें लग चुकी हैं। जिला गन्ना अधिकारी सुनील कुमार बताते हैं कि नीलामी की पहली तारीख आठ मई 2013 थी, तब से आज तक 40 तारीखें लग चुकी हैं।
जब दो-तीन नीलामी में कोई खरीददार नहीं आया तो तय हुआ कि हर महीने की 26 या 27 तारीख को तहसील कोल में नीलामी प्रक्रिया तब तक होती रहेगी, जब तक खरीददार न मिल जाए। बहरहाल, हर बार तारीख पर तारीख तो मिली, लेकिन खरीददार नहीं मिला।
86 हेक्टेयर जमीन पर स्थापित हुई इस मिल में प्लांट का सात हेक्टेयर एरिया मिल मालिकों का है, बाकी 79 हेक्टेयर जमीन लीज पर है। वर्ष 2005 में एडवांस तकनीकी का शुगर प्लांट इस मिल में लगाया गया। वर्ष 2005-06 में ट्रायल चला और इसके बाद उत्पादन शुरू हो गया। रोजाना 25 हजार क्विंटल गन्ना पेराई कर 250 टन चीनी उत्पादन की क्षमता से लैस है ये प्लांट।
गन्ने की पेराई के बाद 10 फीसदी चीनी, 10 फीसदी शीरा और 80 फीसदी छूंछ बचती है, सभी चीजों की हाथों हाथ बिक्री होती है। इस मिल के आसपास की जमीनों में गन्ने की पैदावार भी अच्छी होती है। इसके बाद भी मिल की नीलामी न हो पाने पर कई कारण हैं।
इसी वजह से यहां के हजारों किसानों का 43 करोड़ रुपये का बकाया का भुगतान आज तक नहीं हो पाया है।