सपा नेता संजय यादव ने कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा हार गई, सरकार जीत गई। उन्होंने कहा कि भाजपा के नौ सदस्य ही जीते थे, बाकी सदस्यों का समर्थन सत्ता, पुलिस और धनबल से जुटाया गया है। सदस्यों को उनके घरों से ले जाकर दूसरी जगह पर ठहराया गया। उनके मोबाइल जब्त कर लिए गए। सहायक के रूप में भाजयुमो जिलाध्यक्ष मुकेश लोधी ने वोट डाला। उनको किस नियम से वोट डालने दिया गया।
उन्होंने कहा कि अचानक मतदान से पहले 9 सदस्यों को निरक्षर बता कर उनको सहायक दे दिए गए। इस बीच मतदान से ठीक पहले ही रात में अचानक एक साथ आठ सदस्यों की तबियत बिगड़ गई। उनको भी सहायक दे दिए गए। इस तरह से 17 सदस्यों के स्थान पर सहायकों ने वोट डाले। ये वोट सत्तापक्ष के दबाव में डलवाए गए।
17 में भाजपा के नौ विजयी सदस्यों को मिला दें तो 26 सदस्यों के साथ उनकी चुनाव जीतने की योजना सफल हुई। जिसमें पर्दे के पीछे सत्ता और प्रशासन का पूरा साथ और दबाव काम आया। इसी दम पर उन्होंने 12 अन्य सदस्यों पर भी दबाव बनाया। जिससे उनका आंकड़ा 38 पर पहुंचा।
उन्होंने कहा कि सदस्य निरक्षर हो, नेत्रहीन हो या शारीरिक रूप से वोट डालने में अक्षम हो। ऐसे सदस्यों द्वारा सहायक का अनुरोध किया जाता है, जिसे जांच के बाद मंजूरी दी जाती है, लेकिन अलीगढ़ में जिन 17 सदस्यों को सहायक द्वारा वोट डालने की अनुमति दी गयी। उनमे से 16 सदस्य पढ़े लिखे हैं। सबसे कम साक्षरता हाईस्कूल है। सभी सदस्य देख सुन कर आसानी से चल फिर रहे थे।
कुछ सदस्यों से सहायक लेने की वजह पूछी गई तो जवाब मिला कि घबराहट हो रही थी। किसी ने कहा कि तबियत खराब है। लेकिन ये वजह भी उनको रटाई गई थी। भाजयुमो के जिलाध्यक्ष मुकेश लोधी किस हैसियत से सहायक बने। जिलाध्यक्ष गिरीश यादव ने कहा कि भाजपा को अपने सदस्यों पर भी भरोसा नहीं था इसी भय के कारण उनको भी सहायक दिया गया।