जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाए थे कि शहर में सीवर लाइन और पानी की पाइपलाइन बिछाने के लिए शहर को खोद दिया गया था। सड़कें तोड़ दी थीं। लेकिन बाद में जिस तरह से मरम्मत की जानी चाहिए थी वैसे की नहीं गई। लोग परेशान रहे। शिकायतें करते रहे। मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
सात दिन में रिपोर्ट देगी समिति
नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी है। इसमें सहायक नगर आयुक्त वीर सिंह को सचिव, प्रभारी लेखाधिकारी भरत दूबे, अधिशासी अभियंता बिजेंद्र पाल सिंह और अधिशासी अभियंता अजय कुमार सक्सेना को सदस्य बनाया है। 30 अगस्त को गठित की गई कमेटी को सात दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश जारी किया है।
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत हुए ये कार्य
- इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आई-ट्रिपल सी)-117 करोड़
- एसटीपी प्लांट, मथुरा रोड -108 करोड़
- सूतमिल चौराहा से नादापुल और भांकरी तक स्मार्ट रोड-99 करोड़
- क्वार्सी, सूतमिल व सासनी गेट स्मार्ट चौराहा-96 करोड़
- हैबीटेट सेंटर-79 करोड़
- स्पोर्ट कांप्लेक्स - 57 करोड़
- मल्टी लेवल कार पार्किंग बारहद्वारी - 48 करोड़
- 14 चौराहों का सुंदरीकरण-47 करोड़
- अचल ताल का सुंदरीकरण-28 करोड़
- फसाड लाइटिंग -25 करोड़
- जवाहर पार्क का सुंदरीकरण-20 करोड़
- चार स्थानों पर स्मार्ट रोड -20 करोड़
- वेंडिंग जोन-9 करोड़
- इसके अलावा 217 करोड़ रुपये अन्य विकास कार्यों पर खर्च हुए हैं।