इधर, महासचिव दीपक बंसल ने बताया कि अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह की अध्यक्षता में बार की बैठक हुई। जिसमें तमाम वरिष्ठों की सहमति से इस कार्रवाई का प्रस्ताव पास कर अध्यक्ष ने उन्हें निर्देशित किया है। वे शनिवार को एफआईआर कराने जाएंगे। इस अवसर पर पूर्व अध्यक्ष राजकुमार यदुवंशी, रामप्रताप सिंह, रामकुमार बंसल, राजेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह, हेमेंद्र वाष्र्णेय, कुलदीप आदित्य गुप्ता, राजीव सेठ, नीरज चौहान, प्रवीन नाथ शर्मा, अजय सिंह, श्रीकांत शर्मा, देवेंद्र राघव, आशीष मोहन यादव, पवन प्रताप सिंह, कमला भट्ट, आलोक बंसल, विपिन सिंह राना, वीनू गुप्ता आदि तमाम अधिवक्ता मौजूद रहे।
ये प्रस्ताव भी हुए पास
इसके अलावा बैठक में सबसे पहले बार के वायलॉज में संशोधन के साथ मृत्यु पूर्व दिए जाने वाले अनुदान में संशोधन के तहत अनुदान कम से कम 60 वर्ष आयु या 25 वर्ष सेवा करने पर देने, बीमारी पर एक वर्ष में एक लाख रुपये देने, मृत्यु पूर्व धनराशि अधिकतम 5 लाख देने, चंदा जमा करने की तारीख 30 नवंबर तय करने का प्रस्ताव पारित हुआ। जिसे एक जनवरी 2025 से लागू किया गया है। इसके अलावा कुछ निर्माण कार्य व मतदाता सूची के सत्यापन का प्रस्ताव पारित किया गया।
इस आम सभा में इस प्रस्ताव को लेकर पहले से हंगामे का अंदेशा था। इसलिए बार की ओर से एसएसपी को सुरक्षा संबंधी पत्राचार किया गया था। इसी क्रम में दीवानी सुरक्षा के साथ-साथ यहां पीएसी व थाना पुलिस भी मौजूद रही। जब हंगामे हालात बने पुलिस ने भी बात को संभाला।
ये साजिश-चुनावी रंजिश का हिस्सा, देंगे जवाब
गबन के आरोपों व बार की आम सभा में हुई कार्रवाई की संस्तुति पर पूर्व अध्यक्ष दिनेश सिंह व पूर्व महासचिव विनोद रावत ने कहा है ये पूरा विषय साजिश के तहत चुनावी रंजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान कमेटी के अध्यक्ष व महासचिव को हमने पहला चुनाव हराया था। जब ये दोनों चुनाव जीते तो परिणाम आने के अगले ही दिन बार कार्यालय से चेकबुक व लेखा जोखा बिना शपथ लिए ही ले गए। जिसकी लिखित शिकायत बार कर्मी ने हमसे की। बाद में जब सीए की रिपोर्ट पर अपने अपने लोगों को जांच टीम में रखकर जांच कराई तो हमें सुना नहीं गया। न आम सभा में हमें सुनने का अवसर दिया। हमने एक एक काम अधिवक्ता हित में किए हैं। सभी का लेखा जोखा है। अब हम इसका जवाब उच्च स्तर पर देंगे। ये एकतरफा कार्रवाई सहन नहीं की जाएगी।
पूर्व महासचिव ने दी थाने में तहरीर
आमसभा में हुए घटनाक्रम व प्रस्ताव पारित होने के बाद पूर्व महासचिव विनोद रावत की ओर से थाना सिविल लाइंस में तहरीर दी गई है। जिसमें कहा गया है कि वे प्रतिष्ठित अधिवक्ता के साथ आगामी चुनाव में यूपी बार काउंसिल के संभावित सदस्य भी हैं। इसी से चिढक़र चुनावी रंजिश रखने वाले गुट के पदाधिकारियों ने साजिश रचकर दस्तावेज गायब किए। अब उन पर, पूर्व अध्यक्ष व पूर्व कोषाध्यक्ष पर गबन का आरोप लगाकर मुकदमा कार्रवाई व बार से डिबार करने की घोषणा कर दी। आम सभा में विरोध करने पर अभद्रता की गई। इस घटनाक्रम के बाद उनके प्रति तरह तरह की टिप्पणी की जा रही हैं। वे डिप्रेशन में हैं। इस मामले में उन्होंने मुकदमा दर्ज करने का अनुरोध किया है। शनिवार को वरिष्ठ अधिकारियों से मिलेंगे।