क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की मौलाना आजाद लाइब्रेरी में पाकिस्तान के जनक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगने के मामले पर हाय-तौबा की स्थिति है। सांसद सतीश गौतम ने इसका विरोध कर इस मामले को एक बार फिर हवा दे दी है। भाजपा एवं एबीवीपी नेताओं ने इसकी निंदा की है। जबकि एएमयू छात्र बचाव में उतर आए हैं। कुछ तो इंतजामिया के फैसले से गुस्साए भी हैं।
एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी का कहना है कि गांधी जयंती पर महात्मा गांधी के जीवन पर प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था। इसमें उन तस्वीरों को दर्शाया गया था, जिनसे गांधी जी के संबंध थे। इसी क्रम में महात्मा गांधी के साथ जिन्ना की तस्वीर लगी थी।
एएमयू या भारतीय मुसलमानों को जिन्ना पसंद नहीं थे, लेकिन इतिहास के हिस्से को हम कैसे बदल सकते हैं। गांधी के साथ जिन्ना की तस्वीर का विरोध उचित नहीं है। छात्र नेता हुजैफा आमिर रशादी ने इस विवाद को अनावश्यक बताया है। उनका कहना है कि पिछली बार सांसद सतीश गौतम ने यूनियन हाल में लगी जिन्ना की तस्वीर पर विवाद उत्पन्न किया था।
एक बार फिर वह एएमयू बिरादरी को उकसाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन छात्र उनकी गंदी राजनीति को कामयाब नहीं होने देंगे। रशादी ने लाइब्रेरियन को कारण बताओ नोटिस दिये जाने का जरूर विरोध किया है।
उनका कहना है कि सांसद के दबाव में लाइब्रेरियन को कारण बताओ नोटिस दिया गया है जो उचित नहीं है और न ही एएमयू को शोभा देता है। एबीवीपी के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. पुष्पेंद्र पचौरी ने लाइब्रेरी में जिन्ना की तस्वीर लगाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि अब साबित हो गया है कि एएमयू को जिन्ना से कितना प्रेम है।
भाजयुमो के जिलाध्यक्ष मुकेश सिंह लोधी ने भी लाइब्रेरी में जिन्ना की तस्वीर लगाने की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि हिंदुस्तान में जिन्ना की तस्वीर नहीं लगने देंगे। वह आदमी देश के बंटवारे का जिम्मेदार है।