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उठाया सवाल : आबादी पर खामोशी क्यों

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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देश की सबसे बड़ी समस्या बढ़ती आबादी के समाधान की मांग को लेकर मेरठ के दंपती अपने दो बच्चों के साथ निकल पड़े हैं। मेरठ के ब्रह्मनपुरी मोहल्ले के निवासी पेशे से एलआईसी एजेंट दिनेश तलवार (47 वर्ष) उनकी पत्नी एलआईसी एजेंट दिशा तलवार (44 वर्ष), एयर होस्टेस बेटी सिमरन (19 वर्ष), बेटे मयंक (14 वर्ष) के साथ 120 शहरों में घूम चुके हैं।

दिनेश कहते हैं कि देश के अधिकांश सांसदों और कई राज्यों के विधायकों के साथ 120 शहरों के जिलाधिकारियों को इस संबंध में ज्ञापन देकर आबादी की रोकथाम को ठोस कानून बनाने की मांग कर चुके हैं। कई बार आरटीआई लगा कर सवाल पूछे चुके हैं लेकिन अब तक का नतीजा जीरो है।
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शादी से पहले ही वर्ष 1994 में उन्होंने इस मुहिम की शुरुआत कर दी थी, वर्ष 1997 में शादी की। लेकिन मुहिम नहीं छोड़ी। 24 साल बाद भी वह किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं लेकिन उनको उम्मीद है कि एक दिन जब पानी, जमीन, खाना, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य की सेवाएं नहीं मिल पाएंगी तो लोग खुद ब खुद सोचेंगे। सरकारों को भी सोचना होगा।

खास बात ये है कि दिनेश हर शहर में अपनी कार से जाते हैं और वहां के जिलाधिकारी, सांसद, विधायकों को यथासंभव ज्ञापन सौंपते हैं। इस दौरान वह शहर की सड़कों पर खुद उल्टी दिशा में चलते हैं, जिसमें उनके बच्चे उनकी मदद करते हैं। उल्टी दिशा में चलने का अर्थ जनसंख्या विस्फोट की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। अब भी जाग जाओ।

मेरठ में इस मुहिम की शुरुआत में दिनेश ने 365 दिन लगातार राम धुन बजा कर हर रोज डीएम को ज्ञापन देने का रिकार्ड बनाया है। 80 बार उपवास पर बैठ चुके हैं। 74 हजार पोस्टकार्ड केंद्र सरकार को लिख चुके हैं। पांच हजार बार पीएम को संबोधित ज्ञापन दे चुके हैं।

दिनेश कहते हैं फिर भी वह थके नहीं है। बोले.. 1952 में एक प्रस्ताव आया था कि भविष्य में जिनके दो बच्चे होंगे वही चुनाव लड़ सकेंगे लेकिन इसको सख्ती से लागू नहीं किया गया। हम चीन में किसी भी चीज से आगे नहीं है लेकिन जनसंख्या में हम चीन से आगे निकल जाएंगे। दिनेश ने कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी चंद्रभूषण सिंह को ज्ञापन दिया और आबादी की रोकथाम की पहल करने की अपील की।
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कार्यक्रम हुए पर सार्थक पहल नहीं
गुजरी 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया गया। कुछेक स्थानों पर चुनिंदा कार्यक्रम हुए लेकिन कोई सार्थक पहल नहीं हुई। अलीगढ़ ही नहीं पूरे देश में कमोबेश यही स्थिति है, आबादी रोकने की बात तक नहीं हो रही है। हां, एक एनजीओ की पहल पर 152 सांसदों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को संबोधित ज्ञापन में अपने दस्तखत कर इस ओर ठोस पहल की है। ये और बात है कि अब तक संसद में इस संबंध में कोई चर्चा तक नहीं हुई है।
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