क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
ट्रेनों को समय से संचालित करने के लिए रेलवे बोर्ड की सख्ती बढ़ती जा रही है। लेटलतीफी में एक बड़ा कारण अनावश्यक रूप से ट्रेनों में होने वाली चेन पुलिंग को भी माना गया है। ये सही भी है।
एक बार चेनपुलिंग होने पर ट्रेन तकरीबन 20 से 25 मिनट लेट होती है। आगे चल रही ट्रेन में एसीपी होने के बाद पीछे की सभी ट्रेनें लेट होती हैं।
चेन पुलिंग करने वालों में जनरल कोच, स्लीपर और एसी, हर श्रेणी के यात्री हैं। यही नहीं कई बार रेलवे कर्मी, पुलिस कर्मी और फौजी भी इसमें दोषी पाए जाते हैं, जिन पर कार्रवाई होती है।
ट्रेन संचालन के जानकार पूर्व एसएस एआर खान कहते हैं कि अगर पूरे रास्ते में एक ट्रेन में एसीपी की चार घटनाएं हो जाएं तो ट्रेन तकरीबन डेढ़ घंटे लेट हो जाती हैै। अलीगढ़ में मंडूवाडीह एक्सप्रेस, संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, अमृतसर सियालदाह एक्सप्रेस में सबसे ज्यादा एसीपी की घटनाएं हो रही हैं।
ट्रेनों की लेटलतीफी रोेकने को इलाहाबाद मंडल के आरपीएफ कमांडेंट अमरीष कुमार ने विशेष अभियान चलवाया है। जिसमें एसीपी करने वाले सभी लोगों को पकड़ा जा रहा है। वर्ष 2018 में अब तक 63 मामले पकड़े गए हैं। सभी पर कार्रवाई हुई है, नौ लोगों को जेल हुई है।
-प्रघ्मुन कुमार ओझा, इंस्पेक्टर आरपीएफ।
अब तक 254
1-वर्ष 2016 में 95 ऐसे मामले पुलिस रिकार्ड में आए, 14 को जेल हुई और 76 ने 56,050 रुपये का जुर्माना वसूला गया।
2-वर्ष 2017 में 128 ऐसे केस पुलिस रिकार्ड में आए, 13 को जेल हुई और 115 लोगों से 85,995 को जुर्माना लिया गया।
3-वर्ष 2018 में अब तक 10 जुलाई तक 63 मामले पकड़े गए, जिसमें 9 को जेल हुई और 27,500 रुपये वसूले गए।
4-वर्ष 2018 के जनवरी में 12, फरवरी में 7, मार्च 8, अप्रैल 3, मई 2, जून 21 और जुलाई 15 लोगों को पकड़ा गया है।
जुर्माना और जेल
बिना किसी उचित कारण के ट्रेनों में चेन पुलिंग करने पर रेलवे एक्ट की धारा 141 के तहत कार्रवाई होती है। पहली बार पकड़े जाने पर 500 रुपये का जुर्माना वसूला जाता है और दूसरी बार पकड़े जाने पर 500 रुपये के जुर्माने के साथ तीन महीने की जेल होती है। जुर्माना और सजा रेलवे मजिस्ट्रेट तय करते हैं। रेलवे एक्ट की धारा 141 में पकड़े जाने पर आरपीएफ आरोपी को रेलवे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करती है। मजिस्ट्रेट ही जुर्माना और जेल की सजा सुनाते हैं।
चेन पुलिंग की व्यवस्था
अलीगढ़। ट्रेन में अचानक किसी यात्री का सहयात्री स्टेशन पर छूट जाए, गाड़ी चलने लगे और अचानक किसी की तबियत खराब हो जाए। या कोई ऐसी अनहोनी जिससे मुसाफिरों को कोई सामूहिक परेशानी हो। इस सूरत में सभी ट्रेनों के हरेक कोच में आर्लम चेन लगी होती है। जिसको खींचने से गाड़ी रुक जाती है।
ऐसे हो रहा दुरुपयोग
आर्लम चेन को यात्रियों की सुविधा के लिए लगाया गया है, लेकिन इसका दुरुपयोग बढ़ता जा रहा है। स्टेशन से पहले कोच के दरवाजे तक नहीं पहुंच पाने, नींद नहीं खुलने, नान स्टॉप ट्रेनों में तयशुदा स्टेशन से अलग स्टेशन पर उतरने सहित कुछ अन्य वजहों से एसीपी (आर्लम चेन पुलिंग) की घटनाएं बढ़ रही हैं।