न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) रुड़की के प्रो. एसपी सिंह ने कहा कि निरक्षर लोगों से अधिक बेरोजगारी उच्च शिक्षित लोगों के बीच है। ऐसे में कौशल विकास के साथ-साथ रोजगार का अवसर उपलब्ध कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।
प्रो. सिंह रविवार को एएमयू अर्थशास्त्र विभाग में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह सेमिनार ‘कौशल विकास का स्वरोजगार सृजन में भूमिका : संभावनाएं एवं चुनौतियां’ विषय पर आयोजित किया गया था।
उन्होंने कहा कि निरक्षर लोगों के बीच बेरोजगारी की दर 2.3 प्रतिशत है, जबकि उच्च शिक्षा वाले लोगों के बीच बेरोजगारी की दर 18 प्रतिशत से अधिक है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि भारत में प्रशिक्षण के साथ-साथ उनके लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है।
उसके बाद ही कौशल विकास योजना अपने उद्देश्य में सफल हो सकता है। उन्होंने कहा कि छोटे कारोबारियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराकर अमीर एवं गरीबों के बीच की खाई को कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कौशल विकास के माध्यम से प्रशिक्षित व्यक्ति स्वरोजगार करते हैं तो भारत में आर्थिक विकास को 2 प्रतिशत और अधिक बढ़ाया जा सकता है और देश को सतत विकास के मार्ग पर लाया जा सकता है।
भारतीय आर्थिक परिषद के सचिव डॉ. अनिल कुमार ठाकुर ने कहा कि भारत में कौशल विकास एवं अन्य प्रशिक्षित व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है। इस अवसर पर डॉ. देवेंद्र अवस्थी, प्रो. सैयद नोमान अहमद, प्रो. सहरोज रिजवी, डॉ. कैसर आलम, डॉ. आसिफ, प्रो. ए सलाम एवं आयोजन सचिव डॉ. जमील अहमद आदि मौजूद थे।