फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विरोधी बोले कि देश को विपक्ष विहीन बनाना चाहती है भाजपा

विज्ञापन
विज्ञापन
विरोधी बोले कि देश को विपक्ष विहीन बनाना चाहती है भाजपा
विज्ञापन


ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।

अलीगढ़। सहारनपुर में दलित अत्याचार मामले में बोलने के लिए पर्याप्त समय न देने का आरोप लगाते हुए जिस तरह से बसपा सुप्रीमो मायावती ने राज्यसभा के इस्तीफा दिया है, उसे लेकर बसपा नेता व दलित वर्ग के लिए काम करने वाले सामाजिक चिंतकों ने इसे मायावती का उचित कदम बताया है तो वहीं सपा, कांग्रेस नेताओं ने भी कहा है कि भाजपा देश में ऐसे हालात पैदा करना चाहती है कि जैसे विपक्ष ही नहीं है। इधर, भाजपा ने कहा है कि मायावती का यह कदम चुनाव में मिली हार की हताशा है।
----
--भाजपा के शासनकाल में चारो ओर अराजकता व्याप्त है। कोई भी सुरक्षित नहीं है। आपराधिक घटनाएं बढ़ रही है। अब जब सहारनपुर में दलितों के ऊपर अत्याचार का मसला बहन मायावती ने राज्यसभा में उठाया तो उन्हें इस मसले पर बोलने तक के लिए समय नहीं दिया गया। वहां दलितों की आवाज दबाने का प्रयास किया गया। ऐसे में बहन जी ने उचित और साहसिक कदम उठाया है। बहन जी ने कभी किसी पद की परवाह नहीं की। वह दलितों, पिछड़ों और सर्वसमाज की नेता हैं। उनके नेतृत्व में बसपा ने हमेशा जनता की लड़ाई लड़ी है।
विज्ञापन

सूरज सिंह जिला प्रभारी बसपा
-----
-- बसपा सुप्रीमो मायावती ने दलित वर्ग पर हो रहे अत्याचार को लेकर राज्यसभा में बात रखी थी लेकिन उन्हें राज्यसभा में बोलने का पर्याप्त समय ही नहीं दिया गया। मायावती खुद दलित वर्ग से हैं और उन्होंने दलितों की बात ही वहां उठाई थी। ऐसे में मायावती को जब राज्यसभा में बोलने ही नहीं दिया गया तो फि र उनका राज्यसभा में रहने का क्या फायदा। राज्यसभा से इस्तीफा देकर उन्होंने बिल्कुल सही कदम उठाया है।
केे एम संत रिटायर्ड आईएएस व शोषित वर्ग के चिंतक
--मायावती का प्रकरण बसपा का अपना अंदरूनी मामला है, इसमें कुछ नहीं कहना है। लेकिन पूरे देश की सर्वोच्च पंचायत संसद में अगर किसी की बात नहीं सुनी जाती है तो ये ठीक नहीं है। भाजपा देश को विपक्ष विहीन करना चाहती है। ये अघोषित आपातकाल है। इसके दूरगामी परिणाम होंगे। लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत में अगर नियमों के तहत भी नहीं बोलने दिया जाएगा तो ये बहुत ही चिंताजनक और गंभीर स्थिति है।
-अशोक यादव, सपा जिलाध्यक्ष।
--राज्यसभा में नियमों के तहत मायावती को बोलने का मौका दिया गया लेकिन वह टाइम से बहुत ज्यादा बोल चुकी तो उनको रोका गया। रोकने पर वह नहीं मानी, सभापति पर आरोप लगा कर इस्तीफा देकर उन्होंने अनैतिकता का परिचय दिया है। ये सब हार की हताशा और ढोंग है। अगर उनको बोलने का समय नहीं मिलता तो विरोध करना जायजा था। दलित समाज उनको समझ चुका है इसीलिए सब भाजपा के साथ है।
विज्ञापन

-चौ. देवराज सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष।

--संसद के लोकसभा और राज्यसभा में अगर दलितों और गरीबों की बात नहीं सुनी जाएगी तो लोकतंत्र समाप्त हो जाएगा। भाजपा हर आवाज को बंद करना चाहती है, ये अच्छे संकेत नहीं है। राज्यसभा में अगर बोलने नहीं दिया जाएगा तो सांसद अपनी बात कहां रखेंगे..? मायावती का इस्तीफा देना बहुत कुछ कहता है। ये परंपरा ठीक नहीं बन रही है।
-चौ. विजेंद्र सिंह, कांग्रेस जिलाध्यक्ष।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें