एक तरफ शासन और न्यायालयों के स्तर से लंबित और पुराने मुकदमों के त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया चल रही है। मिशन शक्ति अभियान भी चलाया जा रहा है, मगर थाना पुलिस के स्तर से अभियोजन कार्य में रुचि की कमी दिखाई दे रही है। ऐसा ही मामला सोमवार को एडीजे-13 की अदालत में देखने को मिला। यहां एक दिन में 23 अलग-अलग मामलों में साक्षी (गवाह) तलब थे, मगर एक ही साक्षी अदालत में पहुंचा, वह भी स्वयं। इसको लेकर एडीजे-13 के न्यायाधीश नरेंद्रपाल राणा की ओर से कड़ी आपत्ति जताते हुए एसएसपी को पत्र लिखा गया है।
एडीजीसी सुधाकर कुलश्रेष्ठ के अनुसार, सोमवार को 23 मामलों में साक्षी तलब थे, जिनमें देहली गेट से 3, जवां से 3, खैर से 8, पिसावा से 3, गभाना से 2, अकराबाद से 4 मामलों में साक्षी तलब थे। इस दौरान सिर्फ एक साक्षी ही गवाही के लिए आ सका, वह भी स्वयं ही आया। इस पर अदालत ने एसएसपी को पत्र लिखकर थानेदारों की लापरवाही का द्योतक बताते हुए थानेदारों को इस विषय में निर्देशित करने के लिए कहा है।