वरिष्ठ जेल अधीक्षक बृजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि बीमार बंदियों में 30-45 वर्ष तक के बंदी शामिल हैं। इनमें भी ज्यादातर ऐसे बंदी संक्रमित पाए गए हैं, जो इंजेक्शन से शरीर में नशा घोल रहे थे।
अलीगढ़ जिला कारागार में 22 बंदी एचआईवी पॉजिटिव हैं। इनमें छह बंदी हाथरस के रहने वाले हैं। चिकित्सकों द्वारा इनका नियमित परीक्षण किया जा रहा है। निरंतर दवाएं भी दी जाती हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में जेल में 16 बंदी एचआईवी पॉजिटिव थे लेकिन अब कुल संख्या में छह मरीजों का इजाफा हो गया है।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला कारागार के बंदियों की समय समय पर जांच की जाती है। जो मरीज जिस बीमारी से पीड़ित होता है उसका उसी आधार पर इलाज कराया जाता है। इंटीग्रेटेड डिजिज सर्विलांस सेल और जिला अस्पताल की टीम ने बंदियों की जांच की थी। जांच में 22 बंदियों की एचआईवी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर से उनका इलाज शुरू हो गया है।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक बृजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि बीमार बंदियों में 30-45 वर्ष तक के बंदी शामिल हैं। इनमें भी ज्यादातर ऐसे बंदी संक्रमित पाए गए हैं, जो इंजेक्शन से शरीर में नशा घोल रहे थे। आशंका है कि जेल में आने से पहले किसी संक्रमित व्यक्ति के इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन को खुद पर प्रयोग करने से पॉजिटिव हुए होंगे। जिला क्षय रोग अधिकारी राहुल शर्मा ने बताया कि जिला अस्पताल के अलावा जिले में खैर, अतराैली, छर्रा, गभाना, इगलास में नियमित रूप से करीब 200 मरीजों की जांच की जाती है।
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कारागार में इन बीमारियों के मरीज
जिला कारागार में 1800 बंदी हैं। इनमें 159 महिला बंदी है। इनमें टीबी के 10 मरीज हैं, जबकि अस्थमा के 15 मरीज हैं, जिनकी आयु 55-60 वर्ष है। इसी तरह उच्च रक्तचाप के 50 मरीज हैं। शुगर के 70 मरीज हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी राहुल शर्मा ने बताया कि जिला कारागार में निरुद्ध टीबी व अन्य बीमारियों से पीड़ित बंदियों की जांच स्वास्थ्य विभाग की टीम करती है।