न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक (एनएमसी बिल) के समर्थन में आयुष चिकित्सकों ने महानगर में मार्च निकालकर इसे जल्द से जल्द लागू करने की मांग राष्ट्रपति से की। एएमयू के एके तिब्बिया कॉलेज सहित अन्य कॉलेजों से पहुंचे आयुष चिकित्सकों ने मोदी सरकार के फैसले की जमकर तारीफ भी की।
तिब्बिया कॉलेज के अतिरिक्त अलीगढ़ यूनानी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं एसीएन हास्पिटल, जीवन ज्योति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हास्पिटल, जेडी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हास्पिटल के छात्र-छात्राएं डॉ. नवालुर रहमान खान, डॉ. मोइनउद्दीन, एएमयू छात्र संघ की सीनियर कैबिनेट समरीन फरहा, आमिर चौधरी, डॉ. मुजफ्फर, डॉ. विश्वामित्र, डॉ. अदीबुल अफरीन, डॉ. अकील, डॉ. शुजा आदि के नेतृत्व में तिब्बिया कॉलेज से बीएसएनल कार्यालय, एएमयू सर्किल होते हुए बाब-ए-सैयद पर पहुंचे और अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा।
छात्र नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के एनएमसी बिल के फैसले का स्वागत किया और जमकर तारीफ की। छात्र नेताओं ने कहा कि इस फैसले से मोदी सरकार की सबका साथ सबका विकास का मोटिव झलकता है।
नेताओं ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने सही में उनके कार्यों के महत्व को समझा एवं अहमियत दी है। इस फैसले से देश की चिकित्सा व्यवस्था में भारी सुधार होगा।
नवालुर रहमान खान ने कहा कि एनएमसी बिल सरकार की अच्छी पहल है। इससे देश का हेल्थ सिस्टम सुधरेगा। सरकार से आग्रह है कि बिल को जल्द से जल्द संसद में पास कराए। बाब-ए-सैयद पर आयुष चिकित्सकों से ज्ञापन लेने एडीएम सिटी एवं एसीएम पहुंचे थे।
जेएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर कर रहे विरोध
राष्ट्रीय चिकित्सा विधेयक (एनएमसी बिल) को लेकर एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टर एवं अजमल खान तिब्बिया कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टरों ने अलग-अलग राह पकड़ ली है। जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अब्दुल्लाह आजमी, उपाध्यक्ष डॉ. दीपक अग्रवाल सहित कई डॉक्टर गत दिनों दिल्ली में एनएमसी बिल के विरोध में आयोजित प्रदर्शन में शामिल हुए।
वहीं एके तिब्बिया कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टर इस बिल के समर्थन में सोमवार को सड़क पर उतर आए हैं। जेएनएमसी के आरडीए अध्यक्ष डॉ. अब्दुल्लाह आजमी का कहना है कि इस बिल से हमारे आयुष (आयुर्वेद, यूनानी और होमियोपैथी) के छात्रों को नुकसान है। क्योंकि इस बिल के आने के बाद इन सभी कोर्सेज से लोगों का ध्यान हट जाएगा।
कोई इस कोर्स पर ध्यान नहीं देगा। लोग एलोपैथिक मेडिसन की तरफ ही ध्यान देने लगेंगे जो कि छह माह में संभव नहीं है। डॉ. अब्दुल्लाह का यह भी कहना है कि इस बिल में सिर्फ 40 प्रतिशत सरकार की सहभागिता है। इससे सिर्फ अमीर लोग के बच्चे ही मेडिकल की पढ़ाई कर सकेंगे। इस बिल से सिर्फ कारपोरेट लोगों को फायदा होगा।