न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
करीब दो साल तक निष्कासित रहने के बाद राजेश भारद्वाज ससम्मान भाजपा में वापस आ गए हैं। वह लोकसभा चुनाव में पार्टी टिकट के दावेदार भी माने जा रहे हैं।
विधान सभा चुनाव के दौरान राजेश भारद्वाज पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने का आरोप लगा था। उनकी शिकायत प्रदेश स्तर पर की गई थी। उसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। उस समय चौधरी देवराज सिंह जिलाध्यक्ष थे। राजेश भारद्वाज 2012 में अतरौली विधान सभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर कल्याण सिंह की बहू प्रेमलता वर्मा के खिलाफ चुनाव लड़े थे। उस समय कल्याण सिंह भाजपा में नहीं थे। 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले राजेश भारद्वाज ने टिकट हासिल करने के लिए बहुत प्रयास किया था। करीब दो साल पार्टी से बाहर रहने के बाद पार्टी अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय से निष्कासन आदेश समाप्त करने का आग्रह किया था।
उत्तर प्रदेश अनुशासन समिति के अध्यक्ष सत्यदेव सिंह ने राजेश भारद्वाज को पत्र लिखकर ससम्मान वापसी से संबंधित पत्र जारी कर दिया है। इसके साथ ही उनके निष्कासन का आदेश निरस्त कर दिया गया है। इसकी सूचना मिलने के बाद कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई है। राजेश भारद्वाज ने बताया कि कार्यकर्ताओं के फोन और बधाईयां आ रही है। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष एवं पार्टी नेताओं के प्रति आभार प्रकट किया है। लोकसभा चुनाव के पूर्व राजेश भारद्वाज की वापसी से जिले की राजनीति में चर्चा का बाजार गर्म है। राजेश भारद्वाज एवं एटा सांसद राजवीर सिंह राजू भैया (कल्याण सिंह के पुत्र) के संबंध भी बेहतर हुए हैं।