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सांसद आदर्श ग्राम योजना बहरावद का हाल दूसरी किस्त

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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गांव में विकास कार्य नहीं होने का मलाल बहरावद के हरेेक वाशिंदे को है। सब को उम्मीद थी कि गांव गोद लेने के बाद सांसद सतीश गौतम के निर्देश पर तेजी से विकास कार्य होगा। लोगों का जीवनयापन स्तर ऊपर उठेगा, लेकिन अफसोस कि ऐसा कुछ नहीं हो सका। वर्ष 2014 में इस गांव को गोद लेने के बाद से पूरे पौने चार साल बीत चुके हैं, लेकिन इसकी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ।

उल्टा हालात बद से बदतर हो गए। गांव वाले कहते हैं कि इससे बेहतर होता कि इस गांव को गोद न लिया जाता। गांव वाले प्रशासन और शासन से लड़ झगड़ कर इसका विकास खुद ही करा लेते। प्रधान, पंचायत सचिव और दूसरे अधिकारियों पर काम कराने के लिए दबाव बनाया जाता। कुछ तो होता लेकिन गोद लेने के बाद कुछ नहीं हुआ।
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चार साल बीत गए हैं गांव को गोद लिए हुए। हम ये नहीं समझ पा रहे हैं कि गोद लेने की जरूरत क्या थी, जब कुछ करना नहीं था। हम सब गांव वालों को धोखा दिया गया है। अब हमें नेताओं से सजग रहने की जरूरत है। -अजय सिंह

पूरे गांव में महिलाएं, पुरुष और बच्चे उखड़े हुए खड़ंजे से परेशान हैं। वोट लेने के बाद नेता की चाल कैसे बदल जाती है, यह हमने बहुत करीब से देखा और महसूस किया है। अब हमें अपनी गलती का अहसास भी होता है। -रामजी लाल

हम खुद साफ करते हैं नालियां और गलियां
गांव के अशोक कुमार कहते हैं कि वो खुद अपने घरों के सामने की नालियां साफ करते हैं। कूड़ा उठाते हैं। क्योंकि सफाई कर्मी कभी नहीं आता। उसने एक लड़का लगा दिया है, जो कभी कभार सफाई कर जाता है। उस सफाई कर्मी की शिकायत कई बार हुई लेकिन वो बड़े नेताओं का चहेता इसलिए उस पर कार्रवाई नहीं होती।

उज्जवला योजना.. प्रधान
कहें कुछ डीएसओ कुछ और
गांव के प्रधान राजन सिंह ने बताया कि उज्जवला गैस योजना के तहत पूरे गांव में कोई भी कनेक्शन नहीं दिया गया है। इस संबंध में सांसद सतीश गौतम ने जब कनैक्शन लेने वालों को संख्या पूछी थी तो बताया गया था कि गांव में पूर्व से ही गैस उपभोक्ता हैं। कुछ लोग नियमानुसार उज्जवला गैस कनेक्शन के लिए पात्र श्रेणी में आते हैं, इसके बावजूद भी उनको उज्ज्वला गैस कनेक्शन नहीं दिया गया है। इससे ठीक विपरीत जिला आपूर्ति अधिकारी नीरज सिंह कहते हैं कि गांव में उज्जवला गैस कनेक्शन के लिए गांव में दो बार शिविर लगाया गया। वहां पात्र लोगों को इस योजना से लाभान्वित किया गया, जिसका रिकार्ड मौजूद है।
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आखिर सांसद क्यों
नहीं काम कर पाए..?
गांव के ही सोमवीर सिंह कहते हैं कि हमारी समझ में नहीं आया कि आखिर सांसद यहां कोई काम क्यों नहीं करा पाए! सांसद अगर कुछ नहीं कर पाए तो कम से कम देख तो लें आकर कि गांव का क्या हाल है? गांव वाले कैसे जीवन यापन कर रहे हैं। संजीव कुमार बघेल कहते हैं कि हम गांव वालों का दोष यही है कि हम सब नेताओं की बातों और उनके वादों पर भरोसा कर लेते हैं। अगर भरोसा न करें तो किसी नेता की हिम्मत नहीं है कि वह झूठे वादे कर जाए। अब हमें इस बारे में सोचना चाहिए। हमें ये भी सोचना चाहिए कि नेता के आगे पीछे घूमने से भी कुछ नहीं होता है। इससे सिर्फ नेता का ही रसूख बनता है, गांव या गांव वालों का नहीं।
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