न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
सपा-बसपा गठबंधन पर एएमयू से सवाल उठ रहे हैं। राजनीति पर नजर रखने वाले लोगों का मानना है कि कांग्रेेस एवं रालोद को गठबंधन से बाहर रखना नुकसानदेह है। इससे वोटों का बिखराव रोकने में परेशानी होगी और अंतत: उसका फायदा भाजपा को होगा।
एएमयू छात्र संघ के सचिव हुजैफा आमिर एवं उपाध्यक्ष हमजा सुफयान पहले ही सपा-बसपा गठबंधन को ठगबंधन करार दे चुके हैं।
वहीं एएमयू एग्रीकल्चर फैकल्टी के कोर्ट सदस्य शफीक उर रहमान खान ने तो यहां तक आरोप लगा दिया है कि सपा एवं बसपा का गठबंधन अपनी साख बचाना मात्र है।
सपा एवं बसपा मुसलमानों के वोटों को सिर्फ अपनी सियासी कुर्सी बचाने के लिए इस्तेमाल करती है। दोनों का गठबंधन बीजेपी को फायदा पहुंचाएगा।
कुछ दिन पहले एएमयू के स्टॉफ क्लब में राजनीतिक दलों (भाजपा को छोड़कर) की बैठक आयोजित करने वाले इंटेलेक्चुअल्स फोरम फॉर सेकुलर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस के अध्यक्ष प्रो. शमीम अहमद ने कांग्रेस, सपा, बसपा, रालोद आदि दलों के गठबंधन की वकालत की थी।
इसके साथ ही यह भी कहा था कि सटीक गठबंधन बन गया तो भाजपा को उत्तर प्रदेश में 5-6 सीटों पर समेटा जा सकता है।
प्रो. शमीम अहमद का कहना है कि कांग्रेस एवं रालोद को गठबंधन से बाहर रखने पर बहुत फायदा होने वाला नहीं है। उत्तर प्रदेश में 20 प्रतिशत मुस्लिम हैं। इस पर सपा, बसपा, रालोद एवं कांग्रेस सभी दावे कर रहे हैं।
लोकसभा चुनाव होने के कारण मुस्लिमों का रुझान कांग्रेस की ओर है। उनका कहना है कि हो सकता है 15 फरवरी तक गठबंधन में कांग्रेस एडजस्ट हो जाए।
यह भी हो सकता है कि सपा एवं बसपा मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में कांग्रेस से कुछ सीटें लेकर यहां अपने दावे कुछ कम करें।
इसके अतिरिक्त यह भी हो सकता है कि सपा एवं बसपा को कांग्रेस से खतरा महसूस हो रहा हो। ऐसे में कांग्रेस रालोद के अजित सिंह, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के शिवपाल सिंह यादव, जनता पार्टी के राजा भैया एवं भीम आर्मी के चंद्रशेखर को साथ लेकर कोई गठबंधन बनाए।