न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
शहर में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान की जद में अब महापौर मो. फुरकान का शमशाद मार्केट स्थित मकान पर बना कैंप कार्यालय भी आ गया है। इस संबंध में अलग अलग लोगों नेे अलग अलग पटलों पर शिकायत की है और महापौर के मकान के अतिक्रमण वाले हिस्से को ध्वस्त करने की मांग की है। हालांकि महापौर मो. फुरकान का कहना है कि इस तरह की शिकायतें झूठी हैं।
भाजपा के पूर्व प्रदेश मंत्री राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ ने नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को पत्र लिखकर कहा है कि जहां पर महापौर का आवास है उसके बराबर वाले हिस्से में फ्लैट बनाए गए हैं। इसके गैराज में बसपा का कार्यालय बना दिया गया जिसका उद्घाटन किया गया। यह मामला बेहद चर्चा में रहा। एएमयू के एक प्रोफेसर ने इस मामले की शिकायत अलीगढ़ विकास प्राधिकरण में की गई।
साथ ही शासन को भी प्रति भेजी गई। इसके बाद मुख्यमंत्री के विशेष सचिव अविनाश कुमार ने संदर्भ संख्या 18143180090912 से मामले की जांच के लिए कहा गया। नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने भी अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए कहा। जिसके बाद एडीए ने पत्र संख्या 124य2018 के जरिए जिलाधिकारी के माध्यम से लिखकर दे दिया गया कि मजिस्ट्रेट और फोर्स नहीं मिलने पर अभियान नहीं चलाया जा सका है। पत्र में कहा गया है कि अब इस समय यही अभियान चल रहा है। जनता में यह संदेश नहीं जाए कि सामान्य लोगों और रसूखदारों के बीच भेदभाव हो रहा है। राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ कहते हैं कि जब भाजपा का महानगर कार्यालय को हम स्वयं ही तोड़ सकते हैं तो बसपा के नेताओं का अवैध कब्जा क्यों नहीं टूट सकता है।
‘हमारे पास महापौर मो. फुरकान के आवास के कैंप कार्यालय को लेकर शिकायत आई थी जिसमें अवैध कब्जे को ध्वस्त करने के लिए मांग की गई थी। यह मामला हमारे संज्ञान में है। जल्द ही उचित कार्यवाही हो जाएगी’
- डीएस भदौरिया, अधिशासी अभियंता
‘मेरे एक पड़ोसी हैं जो मेरे संबंध में झूठी शिकायतें करते हैं। विभाग को गुमराह करते हैं। मुझे बदनाम करने के लिए वह यह सभी काम करते हैं। मेरा कैंप कार्यालय नियमों के मुताबिक बना है। कभी भी कोई अधिकारी आकर जांच कर सकता है’
- मो. फुरकान, महापौर
नक्शे में कहीं चौड़ा रास्ता, कहीं संकरा
सिटी मजिस्ट्रेट नलिनी कांत सिंह के मुताबिक नगर निगम और प्रशासन के नक्शे में ही है कहीं चौड़ा रास्ता तो कहीं संकरा रास्ता है। इससे शहर के लोगों में कहीं कहीं यह धारणा बन रही है कि अतिक्रमण हटाने में भेदभाव किया जा रहा है। जबकि वास्तविकता यह नहीं है। हकीकत यह है कि सड़कों की वास्तविक स्थिति ही कहीं ज्यादा चौड़ी और कहीं पर कम चौड़ाई की है। यही स्थिति सभी सरकारी नक्शों में भी दर्ज है।