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जांच में हुआ साफ, बिजली चोरी की रिपोर्ट थी झूठी

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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गत दिनों बिजली चोरी की झूटी रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के मामले में अधीक्षण अभियंता स्तर से कराई गई विभागीय जांच में भी स्पष्ट हो गया है कि बिजली चोरी की रिपोर्ट झूठी लिखवाई गई थी। इस मामले में कथित आरोपियों को तीन लाख रुपये बिजली का बकाया जमा करने के लिए कहा गया था। इस मामले को अमर उजाला ने पिछले दिनों प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आरोपियों के यहां पर केबल पर कोई कट नहीं पाया गया, लेकिन खंभे से अन्य घरों में भी कनेक्शन जा रहे थे जिनकी केबलों पर कट थे। इसका सीधा मतलब यह है कि जो लोग चोरी कर रहे थे, उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं करायी गई। जो लोग निर्दोष थे उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा कर उनका उत्पीड़न किया गया।
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जनहित मानवाधिकर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद पांडेय ने पिछले दिनों अधीक्षण अभियंता से मिलकर पत्र सौंपा था कि शांतिनिकेतन बिजली घर इलाके में नाले की पुलिया के पास रहने वाली रजिया पत्नी सगीर अहमद और शौकत पुत्र फैजुद्दीन के खिलाफ बिजली चेकिंग के दौरान केबल कट होने की बात कहते हुए रिपोर्ट दर्ज करायी गई।

इसके बाद वह विभाग के ही एक रिटायर्ड इंजीनियर के साथ मौके पर पहुंचे तो पाया कि वहां किसी तरह का कोई कट नहीं था। शिकायत मिलने के बाद अधीक्षण अभियंता ने अधिशासी अभियंता मीटर और सहायक अभियंता जांच की संयुक्त जांच कमेटी गठित कर दी।

इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट एसई को सौंपी है, जिसमें कहा है कि दोनों आरोपियों के यहां खंभे से लेकर मीटर तक केबल में कोई कट नहीं पाया गया है। इसके बाद अब एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद पांडेय ने झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने वाले विभागीय अधिकारियों के खिलाफ सस्पेंड करने की कार्रवाई की मांग की है।

- इस प्रकरण में हाई लेवल और उस खंड से अलग अधिकारियों की जांच टीम बनाई गई थी। रिपोर्ट मुझे मिल गई है। यह रिपोर्ट मुख्य अभियंता को भेजी जाएगी। उनके स्तर से ही इस प्रकरण में जो भी आगे निर्णय होगा उसका क्रियान्वयन किया जाएगा। इसके अलावा बिजली चोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी तो लापरवाह विभागीय कर्मचारियों को भी बख्शा नहीं जाएगा।
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- एसबी पाल, अधीक्षण अभियंता, शहर

- जांच में साफ हो गया है कि बिजली चोरी की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। अब विभाग से मांग है कि दोषी कर्मचारियों को बर्खास्त करे। अगर ऐसा नहीं किया गया तो मैं माननीय हाईकोर्ट की शरण लूंगा।
- विनोद पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष, जनहित मानवाधिकार एसोसिएशन
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