न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
जिस वक्त स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी टीबी को लेकर एक आलीशान होटल में प्रेसवार्ता कर रहे थे, उसी समय एक मां मलखान सिंह जिला अस्पताल के परिसर की फर्श पर लेटे अपने बेटे के अस्पताल में भर्ती होने का इंतजार कर रही थी। वह पिछले सात दिनों से उसके पास बैठी इलाज का इंतजार कर रही है। वृद्ध मां की गुहार पर भी अस्पताल प्रशासन का दिल नहीं पसीज रहा है।
मूल रूप से ऊपरकोट निवासी ख्वाजा कुछ दिनों पहले तक फरीदाबाद में किसी फैक्ट्री में काम करता था। वहां पर उसकी तबियत खराब रहने लगी तो उसकी मां उसके पास पहुंच गई। वहां पर इलाज में हो रहे खर्चे और घर से दूर होने वाली असुविधा को ध्यान में रखते हुए ख्वाजा की मां उसे अलीगढ़ ले आयी।
यहां पर उसे उम्मीद थी कि उसके बेटे को अस्पताल में भर्ती कर लिया जाएगा, लेकिन यहां पर जब वह अपने बेटे को लायी तो अस्पताल प्रशासन ने उसे भर्ती करने से ही मना कर दिया।
वजह पूछने पर किसी ने भी स्पष्ट वजह नहीं बताई। ख्वाजा का कहना है कि उसे बुखार, बदन दर्द, पेट दर्द जैसी कई तरह की शिकायतें हैं। ख्वाजा की मां ने बेटे को ओपीडी के सामने जहां पर पर्चे बनते हैं, वहीं पेड़ के नीचे बने टिन शेड के नीचे चादर पर लिटा रखा है।
मां ही आसपास से और घर से खाना आदि ले आती है। इस तरह सात दिन हो गए हैं। यहां पर बंदर और कुत्ते बहुत परेशान कर रहे हैं। इस तरह राहत की उम्मीद में अस्पताल आए ख्वाजा का दर्द अस्पताल आकर ही बहुत बढ़ गया है।
अभी इस मामले में अपने स्टाफ को भेजता हूं। पूरा मामला दिखवाता हूं। इस मरीज के लिए जो भी संभव होगा, मैं अपने स्तर से करूंगा।
- डॉ. रामकिशन, सीएमएस, जिला अस्पताल