इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलीगढ़। एएमयू के निष्कासित शोधार्थी मन्नान वानी का हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़ने का मामला अभी शांत भी नहीं हो पाया है कि भड़काऊ भाषण देने के आरोपों से घिरे डॉ. जाकिर नाइक को शहर के एक स्कूल में बतौर इस्लामिक हीरो पढ़ाए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हैरत की बात ये है कि पुस्तक का प्रकाशक कोई और नहीं, बल्कि स्कूल ही है।
महानगर के दोदपुर स्थित इस्लामिक मिशन स्कूल के कक्षा दो में इल्म-ए-उन-नफे नामक पुस्तक पढ़ाई जा रही है। इस पुस्तक के चैप्टर नंबर-22 ‘हीरोज ऑफ इस्लाम’ है।
इस्लामिक हीरोज में दुनियाभर के स्कॉलर हैं। चैप्टर में डॉ. इसरार अहमद, हारुन याहया, मौलाना तारिक जमील, एस अब्दुल्लाह तारिक, यूसुफ इसेट्स, डॉ. बिलाल फिलिप, मौलाना कलीम सिद्दीकी, शेख अहमद दीदत के बीच डॉ. जाकिर नाइक का जिक्र है। इस पुस्तक को कई साल से पढ़ाया जा रहा है। पुस्तक के संकलनकर्ता स्कूल के प्रबंधक डॉ. कौनेन कौसर हैं।
कौन हैं जाकिर नाइक
डॉ. जाकिर नाइक विवादित इस्लामी धर्म उपदेशक हैं, जिन्हें कट्टरपंथी सलाफी विचारधारा का पक्षधर माना जाता है। डॉ. जाकिर नाइक इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक के अध्यक्ष हैं।
बांग्लादेश में आतंकी हमले से जुड़े तार
डॉ. जाकिर के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए), भारतीय दंड विधान की धारा 20 (बी), 153 (ए), 295(ए) 298 व 505 (2) के तहत आरोप तय किए गए थे। बांग्लादेश में आतंकी हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों ने जब डॉ. जाकिर से प्रभावित होने की बात स्वीकार की तब वह एक जुलाई 2016 को भारत से भाग गए। नवंबर 2016 में जाकिर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। दिसंबर 2016 में जाकिर के एनजीओ पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रतिबंध लगा दिया।
‘इल्म-ए-उन-नफे’ पुस्तक कक्षा दो के बच्चों को पढ़ाई जा रही है। इस किताब में नामचीन शख्सियतों में डॉ. जाकिर नाइक का भी नाम है, जो कई वर्षों से बच्चे पढ़ रहे हैं।
डॉ. कौनेन कौसर, प्रबंधक, इस्लामिक मिशन स्कूल