इंश्योरेंस कंपनी को 15 लाख रुपये के भुगतान का आदेश
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
ट्रक चोरी में बीमा कंपनी ने चालक की लापरवाही मानकर उसके क्लेम को निरस्त कर दिया था। तीन साल चक्कर काटने के बाद भी उसे इंसाफ नहीं मिला। आखिरकार पीड़ित ने स्थायी लोक अदालत की शरण ली। अदालत के तीन सदस्यों की पीठ ने एक महीने में बीमा कंपनी को 15 लाख 31 हजार 300 रुपये के भुगतान का आदेश दिया।
असदपुर क्यामपुर बाईपास निवासी पुष्पेंद्र यादव ने अशोका लीलैंड ट्रक खरीदा था, जिसका बीमा टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा चोला मंडल इन्वेस्ट व फाइनेंस लिमिटेड से ऋण लेकर कराया था। ट्रक की बीमित धनराशि 15,31,300 रुपये थी।
24 मई 2014 को ट्रक ड्राइवर बालू लेने नरौरा जा रहा था। रात के समय रास्ते में ढाबे से ड्राइवर व क्लीनर जब खाना खाकर तीन बजे बाहर आए तो देखा ट्रक अपनी जगह नहीं था। ट्रक बहुत तलाश किया, लेकिन नहीं मिला। इसके बाद बीमा कंपनी को भी सूचित किया और सारे कागज भी संबंधित चोरी से बीमा कंपनी को उपलब्ध करा दिए।
बीमा कंपनी ने वाहन की चोरी होने में ड्राइवर की लापरवाही मानते हए क्लेम निरस्त कर दिया। पीड़ित मानसिक व आर्थिक रूप से पीड़ित था, क्योंकि उसको ऋण ली हुई राशि चुकानी पड़ रही थी। वर्ष 2014 से पीड़ित इंसाफ के लिए कभी इंश्योरेंस कंपनी व फाइनेंस कंपनी के चक्कर काट रहा था। इसके बाद पीड़ित ने स्थायी लोक अदालत में इंसाफ के लिए गुहार लगाई।
अदालत की तीन सदस्यीय पीठ पूर्व जिला जज रियासत हुसैन, वरिष्ठ सदस्य शाजिया सिद्दीकी व डॉ. मीना बंसल ने पुष्पेंद्र यादव के हक में फैसला सुनाया। एक महीने में भुगतान न करने की स्थिति में नौ फीसदी ब्याज के दर से रुपये देना भी नियत किया है।