एटीएस-आईबी भी लौटी खाली हाथ, नहीं मिला कोई सुराग
ब्यूरो,अमर उजाला, अलीगढ़।
सूत मिल बीमा नगर में राज मिस्त्री गंगाराम के मकान में हुए विस्फोट का कारण क्या रहा यह अभी तक रहस्य बना हुआ है। हां, एटीएस और आईबी ने जरूर कोई सुराग न मिलने पर जांच से अपने हाथ खींच लिए। एटीएस सूत्रों ने साफ-साफ मान लिया कि यहां कोई संदिग्ध या आतिशबाजी विस्फोट के कंटेंट नहीं मिले, इसलिए टीम ने जांच पूरी कर ली।
शनिवार को दिनभर खाक छानने के बाद दोनों एजेंसियों को कोई सुराग हाथ नहीं लगा। इसके बाद मलबा बने चारों घरों को रस्सी का घेरा बनाकर पुलिस ने सील कर लिया है और अब वहां किसी के भी आने-जाने पर पाबंदी लगा दी है।
हां, पीड़ित परिवार व बेटियों की ओर से उठ रहीं आवाजों पर पुलिस इस दिशा में जरूर काम कर रही है कि अगर विस्फोट में मारे गए आशू का लापता मोबाइल मिलता है, तो शायद यह पता लग सके कि उसके किन लोगों से संबंध थे और उससे कौन-कौन कब मिलने आता था। इसके अलावा फिलहाल पुलिस आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला से आने वाली रिपोर्ट का भी इंतजार कर रही है।
सात सितंबर को गंगाराम के मकान में विस्फोट हो गया था। विस्फोट को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही थीं। विस्फोट की भयावहता के बाद एटीएस व आईबी के लोगों ने सवाल उठाया कि कहीं विस्फोट की वजह बम तो नहीं था।
इसी का पता करने में रविवार को दूसरे दिन भी दोनों टीमें जुटी रहीं। सूत्रों के मुताबिक, दो दिन की जांच के बाद दोनों टीमों के विशेषज्ञों ने आंतकी घटनाओं या आतिशबाजी में इस्तेमाल की जाने वाले एक्सप्लोसिव कंटेंट के मिलने से इंकार कर दिया है। हालांकि, आगरा की विधि विज्ञान प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने पर ही सच से पर्दा उठ सकेगा। जिसमें विस्फोट से जुड़े सात सबूत सैँपल के रूप में भेजे गए हैं।
इनमें आशू व कुंवरपाल के शरीर के टुकड़े व अन्य वस्तुएं शामिल हैं। इधर, इस हादसे में मारे गए आशू, कुंवरपाल व उनकी मां पुष्पा का परिवार अलग-अलग बयानबाजी कर रहा है। इन तमाम बातों को भी जांच में शामिल किया जा रहा है। पुलिस हर उस बिंदुओं पर जांच कर रही है, जो उसके संज्ञान में आ रहा है। परिवार के हर बयान पर जांच कर रही है।
कभी मृतक की बहन के उस बयान पर पुलिस सजग हो जाती है कि भैया से दो लोग मिलने आए थे तो कभी दूसरी बहन के बयान पर। इसके लिए आशू का लापता मोबाइल मिलना भी जरूरी हो गया है। इधर, तीन घायलों का अभी इलाज जारी है।
-विस्फोट को लेकर हर पहलू पर जांच की जा रही है। सभी एजेंसियां अपनी जांच कर चुकी हैं। किसी को एक्सप्लोसिव कंटेंट नहीं मिला है। फॉरेंसिक टीम ने कुछ साक्ष्य सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे हैं। उनके आने पर काफी कुछ साफ होगा। रहा सवाल परिवार की ओर से आ रही बातों का तो उन्हें भी जांच में शामिल किया गया है। जल्द ही तस्वीर साफ कर दी जाएगी।-अतुल श्रीवास्तव एसपी सिटी
हादसे के तीसरे दिन पटरी पर आने लगी जिंदगी
हादसे के तीन दिन बाद सूतमिल बीमा नगर में जिंदगी पटरी पर लौटने लगी है। रविवार को सामान्य दिन की तरह बाजार में चहल-पहल रही। दुकानें खुलीं। हादसे के बाद बाजार में सन्नाटा पसर गया था। दुकानें बंद हो गई थीं।
घटनास्थल पर पुलिस, बम निरोधक विशेषज्ञ जांच में जुटे थे। वहीं, इस मंजर की गवाह बन चुकी उड़ी छतों को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती रही। दो दिन तक यहां सब कुछ असामान्य था, लेकिन अब हालात सामान्य हो गए हैं।
इस मोहल्ले से गुजरने वाले लोग घटनास्थल को देखते ही कहते कि यहीं विस्फोट हुआ था। दो दिन तक पड़ोसियों से घटना को लेकर खूब पूछताछ हुई। हालांकि, दो दिन के बाद इक्का-दुक्का ही लोग ही घटना के बारे में जानकारी पड़ोसियों से ली। अब वे भी राहत की सांस ले रहे हैं। इस हादसे में आधा दर्जन घर प्रभावित हुए हैं।
पीड़ित परिवार की मदद को बढ़े हाथ
सूतमिल बीमा नगर के मकान में हुए विस्फोट के बाद गंगाराम समेत प्रभावित अन्य लोगों की मदद के लिए लोग आगे आ रहे हैं। हर्षिता सोसाइटी बैनर टांगकर पीड़ित लोगों के लिए रसद सामग्री देने का अनुरोध कर रही है। पड़ोसी भी पीड़ित की मदद कर रहे हैं। बैनर पर नजर पड़ते ही कुछ लोग रुक जाते हैं और मदद के लिए हाथ बढ़ा देते हैं। मदद का सिलसिला शुरू हो चुका है।
टेंट बना पीड़ितों व रिश्तेदारों का आशियाना
हादसे में आधा दर्जन घर चपेट में आए हैं। दीवारें गिर चुकी हैं। छतें उड़ चुकी हैं। हादसे के तीन दिन बाद भी घरों की स्थिति जस की तस बनी हुई है। दरअसल, पुलिस ने हादसा स्थल को रस्सी से घेर दिया है और यहां आने-जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसलिए सड़क पर टेंट लगाकर उसे ही आशियाना बना लिया गया है। अब पीड़ित परिवार के साथ उनसे मिलने वाले रिश्तेदार भी इसी में रात गुजारते हैं। यहां लोगों की मदद से टेंट व पंखे आदि लगवा दिए गए हैं। जिसके सहारे लोग दिन व रात काट रहे हैं।
क्षतिग्रस्त मकान दुकानों में शुरू हुई मरम्मत
इस विस्फोट में क्षतिग्रस्त हुए दर्जन भर के करीब आसपास के मकानों व दुकानों में लोगों ने मरम्मत का काम शुरू करा दिया है। रविवार को ज्यादातर मकानों में कारीगरों की मदद से मरम्मत आदि का काम चल रहा था।
पड़ोसियों के सहारे परिवार, प्रशासन से नहीं मदद
इस हादसे के बाद पीड़ितों के परिवार पड़ोसियों के सहारे हैं। प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की मदद नहीं मिल पा रही है। गंगाराम के परिवार में तीन मौतों के बाद रविवार को शोकाकुल परिवार से जुड़ी परंपराओं का निर्वहन भी पड़ोसियों की मदद से किया गया। हालात यह हैं कि पुलिस द्वारा मलबा बने मकानों को सील करने के कारण वह मलबे में दबे अपने जरूरी सामान भी नहीं निकाल पा रहे हैं।
शासन से दिलवाएंगे आर्थिक मदद : डीएम
बीमानगर कांड में पीड़ित परिवार और और अन्य प्रभावित लोगों की आर्थिक क्षति का आंकलन कर रिपोर्ट जिला प्रशासन के पास भेज दी गई है। एसीएम द्वितीय रेनू सिंह ने लगभग 35 लाख रुपये के आर्थिक नुकसान की रिपोर्ट दी है।
इस संबंध में जिलाधिकारी ऋषिकेश भास्कर याशोद का कहना है कि पीड़ित लोगों को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक मदद दिलवाई जाएगी। इस मामले में शहर विधायक संजीव राजा भी प्रयासरत हैं। शासन से वार्ता करने के बाद निश्चित रूप से लोगों को मदद दिलाई जाएगी। विस्फोट के कारणों को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से आने वाली रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद शासन को भेजी जाएगी।
बेटियों की शादी ली जिम्मेदारी
राष्ट्रीय सेवा संस्थान के अध्यक्ष राजेश गौड़ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल बीमानगर में विस्फोट स्थल पर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने परिवार के तीन सदस्य खो चुके पीड़ित गंगाराम से मिलकर उन्हें सांत्वना दी।
गंगाराम की दो बेटियों की शादी कराने की जिम्मेदारी संस्थान ने ली। राजेश गौड़ ने प्रशासन से मृतक के परिजन को 25-25 लाख व घायलों को 5-5 लाख रुपये की मदद की मांग की है। प्रमेंद्र गौतम ने घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
प्रतिनिधिमंडल में बॉबी गौतम, महेश प्रताप गौतम, आशा शर्मा, पायल शर्मा, अनुराधा शर्मा, हेमलता शर्मा शालू, गीता मित्तल, जलालुद्दीन मलिक, डॉ. दिनेश शर्मा, राकेश शर्मा, सतेंद्र पंडित, अनिल शर्मा, स्वाति शर्मा, खुशबू शर्मा आदि शामिल थीं।