न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
राजस्थान के राजसमंद जिला निवासी एक व्यक्ति का खानाबदोश परिवार की खामोश भक्ति उनकी आर्थिक शक्ति बनी हुई है। 13 सदस्यों का यह परिवार इन दिनों कोल तहसील के बगल में गणेश चतुर्थी के लिए शहरवासियों की डिमांड पर विभिन्न प्रकार की मूर्तियां बना रहा है।
गणेश चतुर्थी के बाद परिवार दीपावली से संबंधित मूर्तियां बनाता है। इसके बाद अन्य शहरों में मूर्तियों की फेरी लगाकर जनवरी-फरवरी के बाद अपने घर चले जाते हैं। होली मनाने के बाद फिर से परिवार शहरों की ओर पलायन करता है।
कोल तहसील के बराबर में खाली पड़े स्थान पर झोंपड़ी डालकर राजस्थान राजसमंद जिले के तलादरी निवासी सोहनलाल मोगिया के पूरे परिवार का व्यवसाय भगवान की मूर्तियां बनाना है। उनके मुताबिक इस तरह से उनका व्यवसाय और भगवान की भक्ति दोनों हो जाती है।
सोहनलाल ने बताया कि वह गणेश चतुर्थी तक गणेश भगवान, नवरात्रों के लिए दुर्गा माता व दीपावली के लिए लक्ष्मी-गणेश के साथ-साथ अन्य भगवानों की मूर्तियां बनाते हैं।
पूरा परिवार अतरौली, हाथरस, इगलास, बुलंदशहर, दादरी, सिकंदराबाद, खुर्जा आदि शहरों में जाता है और भगवान की मूर्तियां फेरी लगाकर बेचता हैं। फरवरी के अंत तक अपने घर की तरफ जाते हैं और होली के बाद वापस फिर से घुमंतू परिवार शहरों में आ जाता है।
इन दिनों शहरवासियों की डिमांड पर विभिन्न प्रकार के गणेश जी की मूर्तियां बना रहा है। इनके पास 101 रुपये से लेकर 13000 रुपये तक की मूर्तियां हैं।
इन वैरायटी में मौजूद हैं गणेश की मूर्तियां
यहां वैरायटी में लाल बाग वाले राजा, मूषक की सवारी वाले गणेश जी, सूर्य गणेश, डगरू सेठ, पूना के राजा, पीपल के पत्ते वाले, सिंहासन वाले, कलश वाले, पगड़ी वाले, मोर वाले, चौकी वाले गणेश आदि शामिल हैं।