पुस्तक विक्रेता के यहां मारा छापा, मिली गड़बड़ियां
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
डीआईओएस के द्वारा गठित टीम ने मंगलवार को शहर में बुकसेलरों के यहां छापेमारी की। छापेमारी में यह बात सामने आई कि बुकसेलर एक नहीं बल्कि कई तरीके से विद्यार्थियों को ठग रहे हैं और शासन के नियमों को ताक पर रखकर पुस्तकों की बिक्री कर रहे थे।
छापेमार कार्रवाई से बुकलेसरों में खलबली मच गई। टीम के प्रभारी नौरंगीलाल जीआईसी के प्रधानाचार्य शीलेंद्र कुमार का कहना है कि वह इस गड़बड़झाले की रिपोर्ट डीआईओएस को सौंपेंगे।
डीआईओएस धर्मेंद्र शर्मा को यह शिकायत मिल रही थी बुकसेलर मानकों को ताक पर रखकर ऊंचे रेटों पर किताबें बेच रहे हैं। यही नहीं सरकारी शिक्षकों द्वारा ट्यूशनखोरी की जा रही है। इस पर उन्होंने टीमें गठित कर दी थी। एक टीम के प्रभारी नौरंगीलाल जीआईसी के प्रधानाचार्य ने यहां अचल ताल स्थित एक बुक सेंटर पर छापा मारा। इसमें उन्हें काफी गड़बड़ी मिली।
शासन ने यह तय कर रखा है कि किस जिले में यूपी बोर्ड के किस प्रकाशक की किताबों से पढ़ाई होगी। इन प्रकाशों की लिस्ट भी यहां भेज रखी है, लेकिन जब टीम ने इस बुकसेलर के यहां देखा तो वहां पिछले साल की पुस्तकें ही बेची जा रही थीं। वह भी उस प्रकाशक की थी, जोकि इस जिले के लिए अधिकृत नहीं था।
जीआईसी प्रधानाचार्य ने कक्षा 11 की अंग्रेजी की किताब में यह भी देखा कि जो सिलेबस इस साल पढ़ाया जाना है, उसका कुछ भाग तो किताब में था ही नहीं। इस छापेमारी के बाद वहां अन्य बुकसेलरों में खलबली मच गई और दुकानें बंद हो गईं।
पूछताछ में बुकसेलर ने यह भी बताया कि तय प्रकाशक की पुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए वह दूसरे प्रकाशक की पुस्तक बेच रहे हैं। आखिर पुराने साल की किताबें क्यों बेची जा रही हैं, जैसे कई सवाल का जवाब पुस्तक विक्रेता नहीं दे सका।
इस तरह भी ठगा जा रहा विद्यार्थियों को
बिकी हुई किताबें वापस नहीं होंगी। यह बोर्ड की बुकसेलरों की दुकानों पर यहां लटका हुआ था। जीआईसी के प्रधानाचार्य शीलेंद्र कुमार ने बताया कि एक तरफ तो पुरानी और ऐसी किताबें विद्यार्थियों को बेची जा रही हैं, जिसमें इस साल का पाठ्यक्रम ही शामिल नहीं हैं।
वहीं दुकानों पर यह भी लिखा है कि बिकी हुई किताबें वापस नहीं होंगी। ऐसे में जब विद्यार्थी किताब खरीदकर लाता है तो उसे पुराने साल के सिलेबस की किताबें बेची जाती हैं।
जब उसे यह पता चलता है कि इस किताब में इस साल का सिलेबस ही नहीं है और वह फिर से दुकान पर जाता है तो उससे किताब बदलने या वापस करने के लिए स्पष्ट मना कर दिया जाता है। इससे स्पष्ट है कि विद्यार्थियों को बुकसेलर ठग रहे हैं।