लगभग 1800 वर्ष पुराने भोजताल आश्रम में महाशिवरात्रि की तैयारियां शुरू हो गई हैं। यहां हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली और आसपास के जिलों से हजारों श्रद्धालु आएंगे। आश्रम के महंत अष्ट कौशल दुर्गा गिरि महाराज ने बताया कि महाशिवरात्रि पर सुबह तीन बजे से जलाभिषेक शुरू हो जाएगा। इसके बाद पूजा-अर्चना होगी। फूल बंगला सजेगा और आरती के बाद भोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद बाबा के प्रसाद का भंडारा होगा। भंडारा दिन भर चलता रहेगा।
इतिहासकारों के अनुसार भोजताल आश्रम करीब 1800 वर्ष पुराना है। इसकी स्थापना बाबा भभूति गिरि महाराज ने की थी। आश्रम लगभग 90 बीघा में फैला है। लोक मान्यता है कि यहां पर इमली के पेड़ की जड़ से शिवलिंग प्रगट हुआ था। आश्रम पर बने ताल की मान्यता है कि इसमें स्नान करने से कुष्ठ व मनोरोगों से निजात मिलती है। आश्रम पर हर साल सावन के सोमवार, नवरात्रि और महाशिवरात्रि के मौके पर 10 बड़े मेले लगते है। श्रीरामलीला व श्रीमद्भागवत कथा होती है।
साढ़े तीन करोड़ से हुए काम
वर्ष 2008 में पर्यटन विभाग ने अचल सरोवर, धरणीधर सरोवर के साथ भोजताल को भी धार्मिक पर्यटन स्थल घोषित किया और सुंदरीकरण कराया। भोजताल में लगभग 2.20 करोड़ रुपये से काम कराए गए। इसी महीने सांसद सतीश गौतम व बरौली विधायक ठा. जयवीर सिंह के प्रयास से पर्यटन विभाग ने 1.22 करोड़ रुपये के काम शुरू कराए हैं।
महाकुंभ में आश्रम की ओर से लगा भंडारा
हर साल बैसाख में ही आसपास के गांवों से आश्रम के लिए अनाज एकत्र किया जाता है। इसी अनाज से पूरे वर्ष के भंडारे का इंतजाम होता है। इसके अलावा आश्रम की जमीन पर सब्जी और फल उगाए जाते हैं। प्रयागराज महाकुंभ में भी आश्रम की ओर से भंडारा आयोजित कराया गया है।