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अलीगढ़ : निःसंतान दंपती को बेचने के लिए 18 दिन की बच्ची अगवा

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बच्ची चोरी के मामले में पकड़ी गईं महिलाएं और युवक। - फोटो : CITY OFFICE
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महानगर में नवजात बच्चे चोरी कर उन्हें नि:संतान दंपतियों को बेचने वाले रैकेट ने बृहस्पतिवार को गांधीपार्क के एक निजी अस्पताल से 18 दिन की बच्ची को अगवा कर लिया। पुलिस ने चंद घंटों के प्रयास में बच्चा बरामद करते हुए गिरोह सरगना सहित छह सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। इस गिरोह की सरगना जिला अस्पताल की स्टाफ नर्स है। गिरोह के पास से एक साल का बच्चा भी बरामद हुआ है, जो झारखंड के दंपती का बताया जा रहा है।
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एसपी सिटी कुलदीप सिंह गुणावत व सीओ द्वितीय मोहसिन खान ने शुक्रवार को पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि हाथरस के सासनी क्षेत्र के गांव बसई काजी के भट्ठा मजदूर इरशाद की पत्नी नगीना को तीन अप्रैल को बच्ची पैदा हुई। पहली संतान के जन्म पर दंपती बेहद खुश थे। इसी बीच उनके गांव की ऊषा नाम की महिला ने नगीना को लालच दिया कि उसकी जानकारी अलीगढ़ के जिला अस्पताल की स्टाफ नर्स से है। वह बता रही थी कि पहली बच्ची पैदा होने पर सरकार से एक लाख रुपये की आर्थिक मदद मिल रही है। इस पर नगीना ने ऊषा की मदद से जिला अस्पताल की स्टाफ नर्स गोविंद नगर क्वार्सी निवासी नेहा से मोबाइल पर संपर्क किया। बातचीत के बाद नगीना बृहस्पतिवार सुबह अपनी जेठानी हुस्नबानो संग जिला अस्पताल पहुंची। इस दौरान नेहा ने बातचीत में बताया कि चूंकि बच्ची घर में पैदा हुई है। इसलिए जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कुछ जांचें होंगी। ये जांच सांठगांठ के जरिये निजी अस्पताल में होंगी। इस पर दोनों महिलाएं तैयार हो गईं और नेहा दोनों महिलाओं को बच्ची सहित गांधीपार्क क्षेत्र में जीटी रोड नौरंगाबाद के हीरालाल अस्पताल ले गई।
इस दौरान वहां पहले से नेहा की सास विमला मौजूद थी। नेहा अपने साथ नगीना को अल्ट्रासाउंड के बहाने अंदर ले गई, जबकि बच्ची को अपनी सास विमला के हाथ में पकड़वा दिया। इसी बीच विमला बच्ची को लेकर गायब हो गई और जब नगीना बाहर आई तो बच्ची गायब देख बच्ची वापस मांगने लगी। मगर नेहा उसे पहले तो टहलाती रही, मगर कुछ देर बाद वह मोबाइल बंद कर गायब हो गई। इस पर नगीना ने अपने पति आदि को वाकया बताया। सासनी से परिजन यहां आ गए और घंटों तक नेहा को तलाशते रहे। रात नौ बजे मामले में थाना गांधीपार्क को सूचना दी। मामले में एसएसपी ने तत्काल एसपी सिटी व सीओ द्वितीय की अगुवाई में टीम गठित की। टीम ने मोबाइल सर्विलांस व सीसीटीवी फुटेज के आधार पर करीब आठ घंटे के प्रयास में बसई काजी की ऊषा, स्टाफ नर्स नेहा, उसकी सास विमला, नेहा के पति विष्णु व सर्वोदय नगर महुआ खेड़ा के रहने वाले नेहा के देवर अभिषेक को गिरफ्तार किया। साथ में मिथिलापुरी की रहने वाली रेनू को गिरफ्तार कर उसके घर से बच्ची को सकुशल बरामद किया। इस दौरान खोजबीन में एक अन्य एक साल का बच्चा बरामद किया है। यह झारखंड की किसी दंपती का बताया गया है।
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घर से मिला फर्जी गोदनामा, बच्चा बेचने की थी तैयारी
पुलिस पूछताछ व रेनू के घर की तलाशी के दौरान एक फर्जी शपथ पत्र पर तैयार गोदनामा मिला है। यह गोदनामा दूसरे एक साल के बच्चे के संबंध में है, जो झारखंड की दंपती से रेनू की किसी महिला को एक साल पहले दिलाया गया था। वहीं 18 दिन की बच्ची को बेचने की तैयारी थी। इसके लिए स्वीकारा कि रेनू के जरिये ही किसी निसंतान दंपती को यह बच्चा बेचा जा रहा था। इसी इरादे से इसे यहां छिपाया गया। मगर उससे पहले पुलिस उन तक पहुंच गई।
स्टाफ नर्स गैंग सरगना, बाकी मीडिएटर/मददगार
पुलिस जांच में साफ हुआ कि इस गैंग की सरगना स्टाफ नर्स नेहा है। वह बच्चा खरीदने वाले निसंतान दंपतियों से सौदा तय करती है। उसकी मदद इस काम में रेनू भी करती है। बाकी गैंग के सदस्य ऊषा, नेहा की सास, पति व देवर सभी मीडिएटर या मददगार के रूप में हैं। खुद अभिषेक एक मेडिकल स्टोर पर नौकरी करता है। विमला भी एक निजी अस्पताल में स्टाफ नर्स के रूप में काम करती रही है। वह तमाम स्वास्थ्यकर्मियों को जानते हैं। उनके संपर्क में ऐसे लोग आते रहते हैं जो बच्चा चाहते हैं। शुरुआत में पुलिस इस गैंग के चार सदस्यों के आपस के रिश्तों पर भरोसा नहीं कर रही थी। मगर बाद में सच सामने आ गया। इन लोगों ने स्वीकारा कि रुपयों के लालच में आकर वह इस धंधे में कूद गए। वे ऐसे गरीब व मजदूर लोगों को निशाना बनाते हैं, जिनको रुपयों की जरूरत हो। उन्हीं को अपने जाल में फंसाकर बच्चे गायब करते हैं।
जिला अस्पताल से जुटाई जा रही जानकारी, दूसरा बच्चा किसका
पुलिस की एक टीम जिला अस्पताल में नेहा के विषय में पूरा ब्योरा जुटाने में लगी है। यह भी देखा जा रहा कि इन लोगों ने पहले कितने बच्चे गायब किए हैं और कितने बेचे हैं। वहीं से कथित तौर पर झारखंड के दंपती के बच्चे के विषय में जानकारी जुटाई जा रही है। अभी उस महिला को भी हिरासत में ले रखा है, जिसको यह बच्चा एक साल पहले फर्जी गोदनामे के आधार पर बेचा गया था। अंदेशा है कि कहीं ये बच्चा अपहरण कर या फिर अस्पताल में इलाज के दौरान तो नहीं गायब किया गया।
एसएसपी का परिवार ने जताया आभार, टीम को दिया इनाम
बच्चा बरामद होने के बाद फिलहाल उसे सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश किया जाएगा। इसलिए बच्चा चाइल्ड लाइन को सौंपा गया है। अब सीडब्ल्यूसी की कमेटी के समक्ष बच्चा पेश किया जाएगा और वहां से बच्चा परिवार को सौंपा जाएगा। दूसरा बच्चा भी उसी टीम को सौंप दिया गया है। जब तक परिवार नहीं मिलता बच्चा वहीं रहेगा। इधर, बच्चे को वापस पाकर परिवार ने दोपहर में एसएसपी से मुलाकात की और आभार जताया। एसएसपी ने भी बच्चे को लेकर परिवार से बातचीत की। वहीं इस खुलासे में शामिल रही पुलिस टीम को 25 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की है।
सीसीटीवी ने बरामद कराया चोरी गया सातवां बच्चा : एसएसपी
एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि गरीब परिवारों को निशाना बनाकर बच्चा चोरी या गायब कर बेचने के गैंग पर पुलिस बेहद गंभीर है। यह पहला मौका नहीं है। इससे पहले महुआ खेड़ा व गांधीपार्क के सड़क पटरी पर रहने वाले परिवार के दो बच्चों के गायब हुए थे। जिनकी सीसीटीवी की मदद से एक महीने तक खोज चली और चार बच्चे बरामद हुए। उस समय भी इसी तरह गैंग पकड़ा गया था। इसके बाद छर्रा अड्डा पुल के नीचे से मजदूर परिवार का बच्चा चोरी कर बेचने वाले दो युवक पकड़े गए। इसी तरह से आज यह सफलता मिली है। इन सभी में पुलिस की सक्रियता और सीसीटीवी काम आए हैं।

थाना गांधी पार्क पुलिस द्वारा बरामद की गई बच्ची।- फोटो : CITY OFFICE

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