अलीगढ़ शहर की घनी आबादी से स्थानांतरित होकर अलीगढ़-आगरा हाईवे, अलीगढ़-पलवल हाईवे, अनूपशहर रोड और कानपुर हाईवे पर पहुंची हैं। इनमें हार्डवेयर, ताला, मूर्ति और डोर फिटिंग मैटेरियल का निर्माण होता है।
बदहाल यातायात व्यवस्था, विस्तार के लिए जमीन की कमी और बेलगाम अतिक्रमण के चलते बीते 10 महीनों के भीतर शहर की लगभग 18 बड़ी फैक्टरियां बाहरी इलाकों में स्थानांतरित हो चुकी हैं। यह इकाइयां शहर की घनी आबादी से स्थानांतरित होकर अलीगढ़-आगरा हाईवे, अलीगढ़-पलवल हाईवे, अनूपशहर रोड और कानपुर हाईवे पर पहुंची हैं। इनमें हार्डवेयर, ताला, मूर्ति और डोर फिटिंग मैटेरियल का निर्माण होता है।
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अलीगढ़ एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशुतोष वार्ष्णेय कहते हैं कि बीते 10 महीनों में लगभग 18 बड़ी फैक्टरियां शहर के बाहर पहुंची हैं। यह कारखाने सक्षम उद्यमियों के थे। शहर में बड़े पैमाने पर कुटीर उद्योग संचालित है, उनकी हालत खराब है। वह बाहर जाने की स्थिति में नहीं है। उनके विषय में सोचना होगा।
एसोसिएशन के मुताबिक अलीगढ़ में 250 से अधिक छोटी-बड़ी निर्यात इकाइयां हैं। इसके अलावा करीब 10 हजार से अधिक कारखाने और छोटी इकाइयां हैं। इनमें कुटीर उद्योग के रूप में संचालित हो रही इकाइयां भी हैं। शहर के पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में अब बिल्कुल भी जगह नहीं है। इकाइयां अपनी क्षमता बढ़ाना चाहती हैं, लेकिन जमीन उपलब्ध न होने के कारण वे बाहर जाने को मजबूर हैं।
बढ़ता ट्रैफिक और माल की लोडिंग-अनलोडिंग में आने वाली समस्याओं के चलते उद्यमियों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे थे। यही कारण है कि बेहतर भविष्य और सुगम संचालन के लिए उद्यमियों ने शहर से बाहर जाने का कदम उठाया।-आलोक झा, चैप्टर चेयरमैन इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन।
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शहर से बाहर जाने वाली फैक्टरियों को अपने विस्तार के लिए जगह की जरूरत थी। वह शहर में उपलब्ध होना संभव नहीं है। यही मुख्य वजह है कि बड़ी फैक्टरियां अब शहर से बाहर जा रही हैं।- मनीष बंसल, मंडलाध्यक्ष, आईआईए।
अलीगढ़ के कुटीर उद्योगों का जीडीपी में भी योगदान है। सड़कों पर अतिक्रमण बेलगाम है। इसी के चलते यातायात व्यवस्था बदहाल है। इस पर सुधार हो तो स्थित में कुछ बदलाव हो सकता है।-अशोक यादव, संरक्षक अलीगढ़ स्टेच्यू सप्लायर एसोसिएशन।