न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
कुछ वर्षों पहले सीएमओ कार्यालय की ओर से जननी सुरक्षा योजना के तहत खाना सप्लाई करने वाली जिन संस्थाओं को काली सूची में डाल दिया गया था, अब उन्हीं संस्थाओं ने अपने नाम में थोड़ी बहुत फेरबदल करके फिर से खाना सप्लाई करने के लिए टेंडर डाला है। यह पूरी कवायद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए है। भाजपा नेता राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, स्वास्थ्य मंत्री और अन्य आला अधिकारियों को भेजी है।
जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसव के लिए आई महिलाओं को सरकारी अस्पतालों और 24 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती मरीजों को सुबह का नाश्ता, दोपहर और रात का खाना दिया जाता है। सुबह के नाश्ते में 200 ग्राम दूध, दो अंडे और दो फल दिए जाते हैं। दोपहर के खाने में 100 ग्राम दाल, 100 ग्राम चावल, 100 ग्राम सब्जी, 5 रोटी और सलाद दिया जाता है।
रात के खाने में 150 ग्राम मौसमी सब्जी, 5 रोटी, 100 ग्राम दाल और एक पीस मिठाई होती है। नाश्ता और दो खाना मिला कर ठेेकेदार को 90 रुपये प्रति दिन प्रति मरीज की दर से भुगतान होता है। अब इस ठेके को हासिल करने के लिए कुछ ब्लैक लिस्टेड फर्मों ने भी दावेदारी कर दी है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एमएल अग्रवाल ने कहा है कि किसी भी ब्लैक लिस्टेड फ र्म को खानापूर्ति करने का ठेका नहीं दिया जाएगा। ठेका देने से पहले फ र्म की पृष्ठभूमि और उसके दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जाएगी। जो नियम हैं उन्हीं के मुताबिक काम होगा।