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डिफेंस कॉरिडोर से अलीगढ़ को मिल सकती है बड़ी भूमिका

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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20 हजार करोड़ रुपये लागत से बनने वाले डिफेंस कॉरिडोर से अलीगढ़ को बड़ी उम्मीद है। जिले के उद्यमी इसे बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि बड़ी भूमिका निभाने को लेकर वे पूरी तरह तैयार हैं। आज झांसी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में इस क्षेत्र के विशेषज्ञ एवं रक्षा सामग्री बनाने वाले उद्यमी इस परियोजना को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। अमर उजाला ने इस खबर को 22 फरवरी 2018 के अंक में पेज नंबर 4 पर प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

जिलाधिकारी चंद्र भूषण सिंह एवं उपायुक्त उद्योग सुधांशु तिवारी के अतिरिक्त कई उद्यमी भी इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने जा रहे हैं। जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त उद्योग सुधांशु तिवारी ने बताया कि सोमवार की झांसी की बैठक में यहां के स्टेक होल्डर भी जा रहे है। इसमें दीप एक्सप्लो इक्यिूपमेंट्स प्राइवेट लि. के तरुण सक्सेना एवं ललेश सक्सेना, नित्या क्रिएशन इंडिया के नवनीत वार्ष्णेय, सिया मैन्युफैक्चरिंग प्रा.लि. के शैलेंद्र राणा, मनीष बंसल, सौरभ अग्रवाल, पीके अग्रवाल आदि हैं।
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उन्होंने बताया कि इसमें जल संसाधन मंत्री उमा भारती, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त डॉ. अनूप चंद्र पांडेय, प्रमुख सचिव सूचना अवनीश कुमार अवस्थी, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के सचिव भुवनेश कुमार आदि शामिल होंगे। उल्लेखनीय है कि फरवरी महीने में लखनऊ में आयोजित इन्वेस्टर्स समिट में अलीगढ़ सहित छह जिलों (लखनऊ, कानपुर, आगरा, चित्रकूट एवं झांसी) को शामिल कर डिफेंस कॉरिडोर बनाने की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में की गई थी।

तीन लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद
20 हजार करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी डिफेंस कॉरिडोर से तीन लाख युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है। खास बात यह भी है कि अलीगढ़ में पहले से ही रक्षा से जुड़े उपकरणों के पार्ट्स बनते हैं। इसमें विस्फोटक जिलेटिन को पैक करने की एल्यूमिनियम क्लिप, डाइनामाइट ब्लास्ट करने वाले इंटोनेटर का लोहे का खोल, खतरनाक विस्फोटक को मिलाने वाली बड़ी मशीनें, स्मोक गैस और टियर गैस के कैप्सूल का एल्यूमिनियम खोल एवं बोफोर्स तोप के गोले दागने वाला स्ट्राइक कैप आदि शामिल है। रक्षा सामग्री बनाने वाले उद्यमी तरुण सक्सेना का कहना है कि अभी वे ग्वालियर एवं दक्षिण भारत के सेंटरों के लिए काम करते है। अलीगढ़ में सेंटर शुरू करने की मांग करेंगे ताकि उत्तर प्रदेश के उद्यमियों व युवाओं को अधिक से अधिक फायदा हो। उनका कहना है कि अभी तो छोटे-छोटे पार्ट्स बनाते हैं। मौका मिला तो बडे़ कार्य भी करेंगे।
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कई कारणों से महत्वपूर्ण है अलीगढ़
डिफेंस कॉरिडोर में शामिल अलीगढ़ कई कारणों से महत्वपूर्ण है। भरतपुर सामरिक एवं रक्षा सामग्री दृष्टिकोण से बड़ा केंद्र है। अलीगढ़ से उसकी दूरी बहुत कम होने का लाभ भी मिलेगा। इसके अतिरिक्त कानपुर भी सड़क व रेल मार्ग से सीधा जुड़ा हुआ है, जहां बड़ी आयुध निर्माण फैक्ट्री है। देश की राजधानी दिल्ली के करीब होने का लाभ भी उद्यमियों को मिलेगा। उत्तर मध्य रेलवे एवं पूर्वोत्तर रेलवे अलीगढ़-हाथरस की सीमा से गुजरता है। साथ ही कई राष्ट्रीय राजपथ एवं यमुना एक्सप्रेसवे अलीगढ़ की सीमा से होकर गुजरते हैं। महानगर जल्द ही हवाई सेवा से भी जुड़ने वाला है। इन सब का लाभ रक्षा सामग्री को देश के महत्वपूर्ण स्थानों पर पहुंचाने में मिलेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि अलीगढ़ के ताला एवं हार्डवेयर इंडस्ट्री के कारीगर छोटे-बड़े पार्ट्स बनाने में माहिर हैं।
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