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हिस्ट्रीशीटर रॉबी व योगेश गिरफ्तार, भेजे गए जेल

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क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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डीएस कॉलेज के बहुचर्चित संजीव चौधरी हत्याकांड के मुकदमे में फरार चल रहे चर्चित हिस्ट्रीशीटर संजीव उर्फ रॉबी व योगेश चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया है। एसओजी की मदद से गांधीपार्क पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर एडीजे-3 के न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया।

वर्ष 2002 में डीएस कॉलेज में टप्पल के गांव उसरह रसूलपुर निवासी छात्र संजीव चौधरी पुत्र बलवीर सिंह एडवोकेट की हत्या कर दी गई थी। इस मुकदमे में वर्तमान में सपा युवजन सभा जिलाध्यक्ष राघवेंद्र सिंह कालू के अलावा मेरठ के चर्चित कविता चौधरी हत्याकांड में आरोपी रहे योगेश चौधरी निवासी गांव ग्वालरा, हरदुआगंज, पूर्व विधायक मलखान सिंह हत्याकांड में आरोपी हिस्ट्रीशीटर संजीव रॉबी निवासी गांव कलाई, हरदुआगंज नामजद किए गए थे।
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कालू इन दिनों जेल में हैं पर मुकदमे के दौरान योगेश व रॉबी गैर हाजिर रहे। अदालत ने इनके खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी किए। इसके बाद अदालत ने 28 फरवरी को धारा 82 के तहत कुर्की की उद्घोषणा का नोटिस जारी किया। 6 मार्च को धारा 83 के तहत दोनों की चल-अचल संपत्तियां कुर्क कर निर्धारित तिथि में आख्या पेश करने के लिए गांधीपार्क पुलिस को आदेश दिए।

इस आदेश के खिलाफ यह दोनों हाईकोर्ट गए। मगर वहां से मात्र दस दिन की राहत मिली। इधर, एसओजी व पुलिस टीम दोनों को तलाश रही थी। सोमवार तड़के मिली खबर पर दोनों को बौनेर के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। इंस्पेक्टर गांधीपार्क रविंद्र सिंह के अनुसार योगेश व रॉबी को गिरफ्तारी के बाद एडीजे-3 के न्यायालय में पेश किया गया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया।

राबी पर 19, योगेश पर हैं 9 मुकदमे
संजीव उर्फ रॉबी के थानों में दर्ज क्राइम रिकार्ड पर गौर करें तो उस पर 19 मुकदमे हैं, जिनमें सबसे चर्चित हत्याकांड क्वार्सी की मानसरोवर कॉलोनी में पूर्व विधायक मलखान सिंह हत्याकांड शामिल है। इसके अलावा कई हत्याएं, हमले, मारपीट आदि के मुकदमे हैं। इसी तरह योगेश पर सबसे मेरठ की कविता चौधरी की चर्चित हत्या की साजिश दर्ज है। इस पर कुल 9 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें सीबीआई में भी एक मुकदमा चला है।

सत्तासीन नेताओं के दबाव में बचाने का लगा आरोप
संजीव हत्याकांड में पैरवी कर रहे अधिवक्ता बलवीर सिंह ने पुलिस पर सत्ताधारी नेताओं के दबाव में पक्षपात का आरोप लगाया है। बलवीर सिंह का कहना है कि पुलिस रात में इन्हें उदयपुर से पकड़कर लाई है। इनसे महंगे व अत्याधुनिक हथियार भी मिले हैं। मगर पुलिस इन हथियारों को बचाने के इरादे से इनकी गिरफ्तारी बौनेर से दिखा रही है। इन्हें मात्र हत्या के वारंट में भेजा गया है, जबकि इनसे जो अवैध हथियार पकड़े गए थे, अगर उन्हें दिखाया जाता तो इनकी जमानत भी मुश्किल होती। यह सब सत्ता के कुछ नेताओं के दबाव में पुलिस कर रही है, जबकि कौन नहीं जानता कि दोनों किन-किन गिरोहों से ताल्लुक रखते हैं।
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योगेश को छोड़ दिया गया था गभाना थाने से
यह बात पिछले माह की है, जब गभाना पुलिस ने कुछ संदिग्धों को एक होटल से दबोचा था, उनमें योगेश भी शामिल था। मगर गभाना पुलिस को योगेश के खिलाफ अदालत से वारंट जारी होने की जानकारी न होने के कारण उसे छोड़ दिया गया था। इस मामले में तत्कालीन इंस्पेक्टर निलंबित हुए थे।
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