बढ़ रही है हिंदी, पढ़ रहे हैं हम
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
हिंदी सिर्फ भाषा नहीं है, बल्कि हिंदुस्तान के माथे की बिंदी है। यह बिंदी सौभाग्य और खूबसूरती की प्रतीक है। हालांकि लंबे समय से हिंदी उपेक्षित भी रही है, मगर अब उसकी उपेक्षा के दिन लद रहे हैं। हिंदी प्रगति पथ पर तेजी से बढ़ रही है। यह मानना है उन छात्र-छात्राओं का जिन्होंने उच्च शिक्षा के लिए हिंदी विषय को चुना है। ये नई पीढ़ी हिंदी में अपने लिए कैसा भविष्य देखती है, इन लोगों ने क्या सोचकर हिंदी विषय को पढ़ने का निर्णय लिया.. इन्हीं सवालों को लेकर अमर उजाला ने हिंदी विषय के साथ जिंदगी का कारवां आगे बढ़ा रहे विद्यार्थियों से बातचीत की। क्या है नई पीढ़ी के नुमाइंदों की राय, सुनिये उन्हीं की जुबानीे...
विद्यार्थियों के बोल
हिंदी का भविष्य सुनहरा है। सबसे खास बात यह है कि हिंदी सहज विषय है, हिंदी आसानी से दिल में उतर जाती है, इसके लिए अलग से कोई कोचिंग करने की जरूरत नहीं है। इसमें कॅरियर भी बनाया जा सकता है।
-राजकुमारी, डीएस कॉलेज
हिंदी हमारी मातृ भाषा, और संस्कृति की वाहक है। इसकी उपेक्षा ठीक नहीं है। आज हिंदी हर क्षेत्र में अपना दम दिखा रही है। हिंदी का प्रसार करना हमारा राष्ट्रीय दायित्व है। संस्कृति खत्म होने का मतलब एक विरासत का खत्म होना है।
-खुशबू राजौरिया, डीएस कॉलेज
हिंदी भाषा और साहित्य से लगाव है। इसीलिए हिंदी विषय को चुना है। निश्चित ही इसकी पढ़ाई से कॅरियर बनेगा।अगर हिंदी में कॅरियर न होता तो तमाम कॉलेज व यूनिवर्सिटी में हिंदी विभाग नहीं होते।
-सुमन, एसवी कॉलेज
हिंदी के भविष्य को लेकर लोगों की सोच बदल रही है। पहले जैसे दिन नहीं रहे। अब हिंदी को भी सम्मान मिलने लगा है। हिंदी किसी एक दिन की मोहताज नहीं है, हर दिन को हिंदी दिवस मानना चाहिए।
-संजना शर्मा, एसवी कॉलेज