डबल मर्डर : सुरेश ने 5 घंटे में पूरा किया थाने तक 5 किमी का सफर
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
दोहरे हत्याकांड के बाद सपा ने पुलिस को घेर लिया और सत्ताधारी दल के दबाव में आरोपी को संरक्षण देने तक का आरोप उछला। दोपहर तीन बजे तक सब कुछ मैनेज हो गया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। यानी घटनास्थल से थाना गांधीपार्क की करीब पांच किमी दूरी तय करने में सुरेश को पांच घंटे का वक्त लग गया। इस दौरान वह कहां-कहां गया और किस-किस से मिला, यह पुलिस जांच का विषय है।
पूर्व विधायक जमीरउल्लाह, जफर आलम, सपा महानगर अध्यक्ष अज्जू इशहाक आदि जिला अस्पताल पहुंच गए। इसी बीच किसी ने खबर दी कि सुरेश पैदल रेलवे रोड से कोर्ट ऑफ वार्ड्स कंपाउंड में गया। वहां से एक नेता की बाइक पर सवार होकर निकला और शाहकमाल रोड पहुंचा। जहां कुछ लोगों ने उसे घेरने की कोशिश की। मगर दोनों बचकर निकल गए। तभी सुरेश का मोबाइल भी बंद हो गया। उसकी आखिरी लोकेशन शाहकमाल रोड रही।
इस दौरान पूरे समय भाजपा नेता भी प्रकरण पर टोह लेते रहे। इसकी वजह यह थी कि अगर माहौल बिगड़ा तो उन्हें तय करना था कि किस भूमिका में रहना है। इधर, अधिकारियों ने आरोपी पर दबाव बनाने के लिए उसके सभी परिजनों को हिरासत में ले लिया। उसके बाद आरोपी समर्पण की मुद्रा में आ गया। तीन बजे एसओजी ने उसे गिरफ्तार कर लिया। वहीं की फिजा में यह सवाल तैरता रहा कि सुरेश को गिरफ्तार किया गया है, या वह खुद पुलिस के पास पहुंचा?
चर्चाओं में रहने वाला बना मोस्टवांटेड
पिछले दो दशक से अपनी कचौड़ी से ख्याति पाने वाले डबल मर्डर का आरोपी सुरेश यहां सामाजिक संगठनों में भी सक्रिय था। बड़े नेताओं व नौकरशाहों से भी उसके संबंध थे। कई धारावाहिकों में काम करने वाले कलाकारों मोनिका भदौरिया, रोहिताश गौड़ के अलावा लेखक मनोज संतोषी ने उसकी दुकान पर जाकर कचौड़ी खाई थी। नौकर उसके यहां काम-काज में लगे रहते और वह अपने व्यापार को मैनेज करता। पुलिस में भी उसकी पकड़ थी। लेकिन इस घटना के बाद वह मोस्टवांटेड बन गया।
राहगीर ने उकसाया, याद दिलाई पिस्टल
सुरेश ने पुलिस पूछताछ में रविवार रात की मारपीट की बात बताई। उसने कहा कि जब सुबह मारपीट हो रही थी तो एक स्कूटी सवार उसके बराबर आया और यह कहकर उकसाया कि अरे तू पिट रहा है, तेरी अंटी में लगी पिस्टल क्या दिखाने के लिए है। इसी बीच वसीम पिस्टल खींचने लगा। इसके बाद ही उसने गोली चलाई।
मां-बाप के बाद ताऊ ने पाला मृतक भाइयों को
अलीगढ़। इस घटना में मारे गए वसीम उर्फ भीम व आशू कुल छह भाई थे। इनमें सबसे बड़ा सोनू विवाहित है, जबकि उससे छोटे वसीम, निक्की, काले, आशू व सलीम की शादी नहीं हुई। इनके माता-पिता की काफी समय पहले मृत्यु हो चुकी थी। इसके बाद यह ताऊ ताई के सहारे थे। ताऊ खुद टायर पंचर की दुकान सराय बैरागी के मुहाने पर चलाया करते हैं, जिससे सभी लोग जुड़े थे। खुद वसीम का 1999 से आपराधिक गतिविधियों से नाता हो गया। उस पर थाना बन्ना देवी में गोपी हत्याकांड का मुकदमा लगा। गोपी इलाके का दबंग था। उसकी हत्या के बाद वसीम ने वह कद हासिल कर लिया और छोटी मोटी रंगदारी वसूलने लगा। इसी बीच गांधी पार्क में आर्म्स एक्ट का मुकदमा दर्ज हुआ। इलाका पुलिस तक उसकी शिकायतें पहुंचती थीं। जब तब पुलिस उसे डराया धमकाया करती थी। करीब दो साल पहले उसकी बुआ की घर के बंटवारे के विवाद में घर के बाहर हत्या हुई, जिसमें उसके ताऊ ताई का नाम आया था। इलाके में दबंग छवि का लाभ उसके भाई भी उठाया करते थे।
दो गोलियां लगने के बाद भी उठ खड़ा हुआ वसीम
इस हत्याकांड का एक फुटेज भी वायरल हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जिस वक्त सराय वैरागी के बाहर रेलवे रोड पर गोलियां चलीं, उस वक्त सामने मार्केट में और बगल में इंदिरा मार्केट में भीड़ थी। तभी एकाएक सुरेश ने पहले वसीम और फिर पीछे से आए आशू को गोली मारी और भाग गया। इसके बाद दोनों मौके पर काफी देर तक पड़े रहे। किसी ने उठाने की जहमत नहीं उठाई। मगर तभी अचानक वसीम ने उठने की कोशिश की और मदद के लिए पुकार लगाई। लेकिन वह फिर वहीं गिर पड़ा। बाद में पुलिस के आने पर उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया गया। पोस्टमार्टम में दोनों के दो-दो गोलियां सीने व पेट के हिस्से में लगने का उल्लेख आया है।
फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज
घटना के बाद एसओजी, फील्ड यूनिट व सर्विलांस टीम भी सक्रिय हो गई। फील्ड यूनिट ने जहां एक तरफ मौका-ए-वारदात से साक्ष्य एकत्रित किए। वहीं एसओजी व सर्विलांस टीम ने बाजार से सीसीटीवी फुटेज भी एकत्रित किए। हालांकि अभी पुलिस यह नहीं बता पा रही कि किसी सीसीटीवी में कुछ मिला है या नहीं। मगर इतना जरूर है कि घटना स्थल के दोनों ओर कई सीसीटीवी लगे हुए हैं।