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आचार संहिता के दौरान दी गई बूचड़खाने को अनुमति

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आचार संहिता के दौरान दी गई बूचड़खाने को अनुमति
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।


अलीगढ़। सपा के पूर्व विधायक जफर आलम के अमरपुर कोंडरा स्थित बूचड़खाने (अल-हलाल इंटरनेशनल प्रा. लि.) को चुनाव आचार संहिता के दौरान गलत तरीके से संचालन की अनुमति दी गई। आहुति संस्था के सदस्यों ने यह आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से जांच और संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
रामघाट रोड स्थित होटल में आहुति के अध्यक्ष अशोक चौधरी, उपाध्यक्ष राज कुमार गुप्ता, विनोद आरबी, हंसपाल गुप्ता, वीपेंद्र गुप्ता, रविंद्र आदि ने पत्रकारों से बात की। कहा कि एक फरवरी 2017 को जफर आलम के बूचड़खाने को प्रतिदिन 200 भैंस काटने की अनुमति ट्रायल के रूप में तीन महीने के लिए दी गई।
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उस समय प्रदेश में विधानसभा चुनाव चल रहे थे। भाजपा सरकार बनने पर अधिकारियों ने चुपके से 22 अप्रैल 2017 को ट्रायल अवधि बढ़ाकर 31 दिसंबर 2017 कर दी। अशोक चौधरी ने आरोप लगाया कि बूचड़खाने को भूगर्भ जल प्राधिकरण का अनापत्ति प्रमाण पत्र भी हासिल नहीं हुआ है। इसका भू उपयोग अभी भी कृषि योग्य ही है। आर्थिक लाभ के लिए नगर निगम के अधिकारी अवैध बूचड़खाने को रोकने को लेकर गंभीर नहीं हैं। प्रदूषण नियंत्रण संबंधी मानक पूरे नहीं होने के कारण नगर निगम का मकदूमनगर स्थित बूचड़खाना बंद है। निगम के अधिकारी नहीं चाहते कि शहर के मांसाहारियों को स्तरीय व स्वच्छ मांस खाने को मिले।
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वर्जन
मीट फैक्ट्री के संबंध में 2014-15 में सभी सरकारी औपचारिकताएं तैयार कर ली गई थीं। जिनके प्रूफ संबंधित सरकारी दफ्तरों में देखे जा सकते हैं। अब लोग क्या कह रहे हैं, मैं इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।
जफर आलम, पूर्व सपा विधायक
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