क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
बच्चियों से मारपीट एवं शौचालय साफ कराने के सनसनीखेज प्रकरण में मंगलवार को नया मोड़ आ गया। इस मामले में डीएम के आदेश पर बर्खास्त शिक्षिकाओं गुंजन व उपसना के समर्थन में विद्यालय की बालिकाएं एवं उनके अभिभावक आ गए। इन लोगों ने डीएम से मुलाकात कर दोनों शिक्षिकाओं को निर्दोष बताते हुए उन्हें वापस लाने तथा दो अन्य शिक्षिकाओं पर उन्हें फंसाने की साजिश के तहत वीडियो बनवाने का गंभीर आरोप मढ़ डाला। यहां तक कि उन्होंने वीडियो में दर्शायी गई छात्राओं को भी दोषी ठहराने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।
रविवार को कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय मडराक में बच्चों से अमानवीय बर्ताव, मारपीट, शौचालय व परिसर साफ कराने, पंखा झलवाने, रोटी बनवाने, मालिश करवाने, खाना बनवाने एवं सरकारी रजिस्टर में ब्यौरा दर्ज कराने से संबंधित कई वीडियो वायरल हुए थे। सभी आरोप यहां की पूर्ण कालिक संगीत शिक्षिका गुंजन पांडेय पर लगाए गए और वार्डन उपासना सिंह उनकी पूर्ण सहयोगी दिखाई गई। इस मामले में डीएम के आदेश पर दोनों शिक्षिकाओं को बर्खास्त कर एफआईआर दर्ज करा दी गई।
मंगलवार को इस बहुचर्चित मामले में विद्यालय की दर्जनभर से अधिक छात्राएं एवं उनके अभिभावक जन सुनवाई के दौरान डीएम से मिलने पहुंचे। उन्होंने शिक्षिका गुंजन व उपासना को निर्दोष बताते हुए दो अन्य शिक्षिकाओं रैना एवं शालिनी को उत्पीड़न के लिए दोषी ठहराया। उन्होंने इन दोनों शिक्षिकाओं पर वीडियो में दर्शायी गई छात्राओं को प्रेरित कर बर्खास्त शिक्षिकाओं के खिलाफ वीडियो बनवाने जैसे संगीन आरोप भी लगाए। यहां तक की वीडियो में दर्शायी गई छात्राओं पर भी बदमिजाजी से लेकर कई अन्य गंभीर आरोप जड़ डाले। अभिभावक हरेंद्र ने कहा कि दोनों नई आयी शिक्षिकाएं न तो पढ़ाती हैं और न ही बच्चियों से उनका बर्ताव ही अच्छा है। डीएम चंद्रभूषण सिंह ने कहा कि मामले की जांच चल रही है। जांच के बाद सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा।
डीआईओएस को लगाई फटकार
अलीगढ़। बर्खास्त शिक्षिकाओं में से एक पर तीन चार माह पूर्व भी उत्पीड़न के आरोप लगे थे। इसकी जांच भी हुई, लेकिन बताया जाता है कि उसे शिक्षा विभाग के एक उच्चाधिकारी के इशारे पर दबा दिया गया। डीआईओएस ने मंगलवार को डीएम को इसकी जानकारी दी तो वे बिफर गए। उन्होंने रोषपूर्ण लहजे में कहा कि उन्हें पहले इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। जानकारी मिलती तो उसी समय कार्रवाई होती।